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rani ki vav full history जिसकी फोटो 100 रुपए के नए नोट पर छपी है

क्या है रानी की वाव | rani ki vav history in hindi | जिसकी फोटो 100 रुपए के नए नोट पर छपी है , kya hai rani ki vav puri jankari hindi me  वाव का अर्थ है वावड़ी , पुराने जमाने में गांव और शहरों में पानी की आपूर्ति के लिए जगह जगह बावड़ी बनाई जाती थी , ताकि प्रजा को पानी की कमी न हो।


rani ki vav history in hindi
मौजूदा भारत सरकार ने रानी की वाव [ बावड़ी ] की याद को चिरंजीवी बनाने के लिए नए 100 के रुपए के नए नोट में इसकी तस्वीर लगाई है ,

वावड़ी प्राकृतिक पानी के स्तोत्र भी होते थे जहा पानी कभी ख़तम नहीं होता था , rani ki vav   रानी की वाव (बावड़ी) को वर्ष 1063 में सोलंकी शासन के राजा भीम देव प्रथम की याद में उनकी पत्नी रानी उदयामति द्वारा स्मृति चिन्ह के रूप में बनवाया गया था.

rani ki vav history in hindi
rani ki vav history in hindi :-
रानी की वाव  का निर्माण जटिलता पूर्ण तरीके से किया गया है  यह बावड़ी 64 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा तथा 27 मीटर गहरा है। यह भारत में अपनी तरह का अनूठा वाव है। इसे 22 जून 2014 को इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में भी शामिल किया गया .गुजरात में पाटन शहर में बावड़ी आपको देखने को मिलेगी .

सबसे पहले इसका निर्माण 300 BC में किया गया था ,समय समय ,रानी की वाव जटिल उलू-गुर्जरा वास्तुकला शैली में एक उलटा मंदिर और सीढ़ियों के सात स्तरों के साथ बनाया गया था और 500 से अधिक देव मूर्तियां रखती हैं.

सीढ़ीदार कुएं भारतीय उपमहाद्वीप में भूमिगत जल स्तोत्र प्रणाली का एक बहु आयाम रूप है.आपको बतादें अक्टूबर २०१६ में रानी की वाव ने स्वच्छतम आइकॉनिक प्लेस" का खिताब जीता। श्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन समारोह में खुद इस बाबड़ी को सम्मानित किया है .


अतुलनीय वास्तु कला :-
इतिहास कारों की माने तो ये बावड़ी अपने प्रकार की सबसे बड़ी और सबसे भव्य संरचनाओं में से एक रही होगी। इस कुएं की दीवारों में चरों और मूर्तिकला का ख़ास प्रदर्शन किया गया था जिसके अब सिर्फ निशान ही बाकि हैं ,परन्तु इस भव्य ईमारत का एक पिलर आज भी दिखाई देता है ,जिससे पता चलता है ये ईमारत ईंट और पत्थर से बानी है

के अंतिम छोर में एक 30 किलोमीटर लम्बी सुरंग भी है जो पतन के पास सिंधपुर तक जाती थी लेकिन अब ये सुरंग मिटटी और पत्थर से बंद हो चुकी है.

बावड़ी की मूर्तियां :-
रानी की वाव जो कुआं है उसकी दीवारों में ज्यादातर मूर्तियां भगवानी विष्णु के दस अवतारों की है ,इसके इलावा नागकन्या की मूर्तियां ,अप्सराओं की आकृतियां , अप्सराओं की मूर्तियों में सोलह सिंगार की झलक मिलती है ,

वाव के और भीतर पहुँचने पर आपको ८०० कलाकृतियां देखने को मिलेंगी ,जिनमे राम, कृष्ण , विष्णु ,नरसिंघ वावन ,अवतार आदि ,इसके साथ ऋषिओं की मूर्तियां भी बनाई गयी हैं, पानी की सतह के पास शेष शयीया पर सवार विष्णु भगवान की अलौकिक कलाकृति भी है

रानी की वाव के चारों और औषधीय गुणों बाले पौधे लगे हुए हैं , सुनने में आया है इन आयुर्वेदिक पौधों की बझा से उस वावली का पनि भी औषधीय गुणों से भरपूर है ,इस पानी से मौसमी बुखार और कई रोगों में गुणकारी मन जाता है .
rani ki vav :-
ऐतिहासिक जानकारी बताती  है की ,रानी की वाव का एक अर्थ ये भी है  [ रानी के कदम अच्छी तरह से ] इसे चोल की वव भी कहते है ,जो चालुक्य शाशन काल की याद दिलाता है ,1980 के दशक में सरस्वती नदी में आयी बाढ़ के कारन , तरह भर गयी , फिर पुरातत्व विभाग द्वारा इसे दोवारा खोला गया ,आश्चर्यचकित करने वाली बात इसकी नक्शावी ठीक वैसी थी जैसी पहले थी

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