-->

राम भगवान जी ने हनुमान जी पर बाण क्यों चलाये जानिए धरम इतिहास bhagwan ram ne hanuman par ban chalaye

अच्छे लोगो की संगति में कुछ अच्छा ही मिलता है एक बार मै अपने दोस्त के घर गया वो दोस्त बहुत धार्मिक वयक्ति था ,तो जबभी उसके पास बैठो वो कोई न कोई धार्मिक कहानिया सुनाना शुरू कर देता . उसकी बातें और विचार दुनिया से निराले और अलौकिक थे जब मै उसके पास गया तो बातो ही बातो में उसने एक कथा सुनाना शुरू कर दी जो मै आपके साथ साँझा कर रहा हु अगर मुझसे कोई गलती हो जाये तो क्षमा करना.


.उसने सुनाना शुरू किया के एक बार नारद जी किसी राजा के दरवार में ईश्वर के गुणगान कर रहे थे ,राजा ने नारद जी से सवाल किया के हे ऋषि ,आप आठो पहर ईश्वर के गुणगान करते रहते है मुझे एक बात बताओ के ईश्वर बड़ा है या ईश्वर का नाम .

नारद जी बोले के ये एक ऐसा विषय है जो  आपको समझा नहीं सकता अनुभव जरूर करा सकता हु .राजा मान गया बोला ठीक है अनुभव ही करा दीजिये .नारद जी बोले जब भी तुम्हारे दरवार में विश्वामित्र जी पधारे तुम उनका आदर सम्मान मत करना उनके सामने अपना सर मत झुकाना ,राजा मुनि की बात मान गया ,

कुछ दिनों बाद प्रभु श्री राम जी ने एक सभा बुलाई उसमे वो राजा भी बैठा था . उसी समय विश्वामित्र जी का आगमन हुआ सभी दरवारिओं ने विश्वामित्र जी का आदर सत्कार किया प्रभु श्री राम जी ने भी उनके चरणों में शीश झुकाया .लेकिन वो राजा न तो अपने आसन से उठा और न हीं उनका सत्कार किया.

विश्वामित्र जी ने प्रभु श्री राम जी से कहा  रघु कुल की सभा में मेरा इतना अपमान एक राजा मेरे सम्मान के लिए अपनी जगह न से उठा.प्रभु श्री राम जी  ने प्राण लिया के जिस राजा ने विश्वामित्र जी का अपमान किया उस राजा का सर सूर्ये अस्त होने से पहले विश्वामित्र जी के चरणों में होगा .

इतना सुनते ही राजा के हाथ पाऊँ फूल गए वो बहां से भाग गया और सीधा नारद जी के पास गया और बोला आपने तो मेरे प्राणो की आहुति दे दी ,अब मेरे प्राण नहीं बचते ,


नारद जी बोले तुम चिंता मत करो अभी तो तुम्हे ईश्वर के नाम की महिमा का पता चलेगा .मुनि बोले जैसा मै कहता हु बैसा करो .तुम माता अंजनी जी से आपने प्राणो की रक्षा का बचन ले लो .

राजा घबराया हुआ माता अंजनी जी के पास गया और बोला माता मुझे एक बचन दो के आप मेरे प्राणो की रक्षा करोगी . माता ने कहा ठीक बचन देती हु, परन्तु  तुम्हारे प्राण लेना कौन चाहता है ,राजा ने सारी बात बता दी ,

माता अंजनी ने हनुमान जी को बोला के इस राजा के प्राणो की रक्षा का बचन दिया है मैंने ,इस बचन को अब तुम्हे ही पुरा करना है .शाम होने बाली थी , प्रभु श्री राम राजा को ढूंढ़ते हुए बहां आ गए ,

तब हनुमान जी ,राजा और श्री राम जी के बीच आए और बोले हे प्रभु ,मेरे जीवित रहते हुए आप ,इस राजा के प्राण नहीं हर सकते ,श्री राम जी ने बहुत समझाया पर हनुमान जी न माने .




तब प्रभु श्री राम ने बोला जैसी तुम्हारी इच्छा ,हनुमान जी उसी समय ईश्वर के ध्यान में बैठ गए .प्रभु ने आपने अस्त्र शस्त्र चलना शुरू कर दिए लेकिन ,हनुमान जी पर उनका कोई प्रभाव न पड़ा श्री राम जी के सारे अस्त्र शस्त्र खाली चले गए आप जानते है ऐसा क्यों हुआ .क्यों के हनुमान जी प्रभु श्री राम  जी का ध्यान कर रहे थे .

उसी समय विश्वामित्र जी भी बही पधारे ,श्री राम जी के अस्त्र खाली जाते देख . ऋषि बोले  जो काम अस्त्र शस्त्र न कर सके वो काम मेरा श्राप कर देगा , राजा थरथर कांपने लगा नारद जी से बोला अब क्या करू ..मुनि नारद बोले अब तुम विश्वामित्र जी के चरणों में अपना सर झुका दो और उनसे आपने क्षमा मांग लो .

राजा पल भर में ऋषि के चरणों में अपना सर झुका कर लेट गया और क्षमा मांगने लगा , नारद जी बोले जो पर प्रभु श्री राम जी ने लिया वो पूरा हुआ शाम होने से पहले राजा का सर आपके चरणों में है .ऋषि ने राजा को क्षमा कर दिया ,


तो इस तरह से राजा के प्राणो की रक्षा हुयी और ,उसको प्रभु के नाम की महिमा का पता चल गया . मित्रो आपको प्रभु की ये लीला कैसी लगी अपणे विचार कमेंट के द्वारा बताएं.


EmoticonEmoticon