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चन्द्रप्रभा वटी के फायदे हिंदी में पढ़ें chander prbhva vati ke fayede

चन्द्रप्रभा वटी  के फायदे हिंदी में पढ़ें chandr prbha vatti ke fayede चन्दर प्रभा वटी आयुर्वेदिक ओषधि है इसके गयी फायदे है बहुत सरे रोगों में इस ओषधि का प्रयोग किया जाता है जिनकी जानकारी आज आपको इस आर्टिकल में मिल जाएगी .यहाँ मई आपको इस ओषधि में कितनी जड़ी वुटियाँ मिलायी जताई है इसकी जानकारी नहीं दे सकता लेकिन इतना बता सकता हु की चंद्र प्रभा वटी को बनाने के लिए लगभग ४०-४५ जड़ी वुटिओं का प्रयोग किया जाता है  जो शरीर के लिए फायदेमंद होती है और व्यक्ति के रोग प्रति रोधक शक्तिओ को बढ़ाने में सहायक होती है .


चन्द्रप्रभा वटी  के फायदे :- 
गर्मिओं के दिनों में मूत्र रुक रुक कर आये  या मूत्र प्रणाली में  किसी भी प्रकार की विकृति हो जाये तो पेशाव का रंग लाल या पीला हो जाये ,पेशाव में अल्बुमिन आये शर्करा की मात्रा आना शुरू हो जाये तो चब्दर प्रभा वटी कर प्रयोग करना फायदे मंद होता है , मूत्र में जलन पेडू में डाह में भी लाभकारी है . इसके सेवन से मूत्र प्रणाली और मूत्राशय  के विकार दूर हो जाते है जिस से पेशाव जलन रहित और साफ़ आने लगता है .

चन्द्रप्रभा वटी ke fayede for female :- 

चन्दर प्रभा वटी गर्भाशय को भी बल और शक्ति प्रदान करता है , अधिक मैथुन करने से शरीर की काँटी नष्ट हो जाती है चेहरा पीला और मुरझाया हुआ हो जाता है , कम आयु में बच्चे पैदा हो जाने के बाद , गर्भाशय कमजोर हो जाता है ,भूख काम लगश है , लाल रक्त कानो की कमी हो जाती है .मासिक धरम के समय अधिक दर्द या कष्ट होने लगता है .स्त्री बच्चा पैदा करने में असमर्थ हो जाती है , ऐसी स्थिति में फलघृत ,अशोक धृत के साथ इसका सेवन करवाना चाहिए
चन्द्रप्रभा वटी  के फायदे for man :- 
पुरुषों  में अधिक कामवासना के कारण धात और स्वपन दोष जैसे  गंभीर रोग लग जाते है ,इंद्री कमजोर हो जाती है थोड़ी की गर्मी आने पर वीर्य निकल जाता है , स्त्री की कल्पना मात्र से वीर्य निकल जाता है ,लिंग में उत्तेजना काम होने लगती है ,इस रोग में गिलोय के साथ  चंद्र प्रभा वटी का सेवन करवाया जाना चाहिए ,अति शीघ्र लाभ मिलता है .


पेशाव काम आने परया मूत्र रुक रुक कर आने शरीर में कई प्रकार के विषैले पदार्थ इकट्ठा होना शुरू हो जाते है ,जो किड्नी को डैमेज कर सकते है ,चंद्र प्रभा वटी के सेवन से ,पेशाव खुल कर अत है ,वृक की सफाई हो जाती है ,
इसके  इलावा चंद्र प्रभा वटी , धात रोग के लिए स्वपन दोष के लिए , सूजाक ,भगंदर अल्बुमिन पेशाव में शुगर आना , अश्मरी , पाण्डु रोग , अर्श आदि रोगो में भी इसका सेवन किसी योग्ये बैद  की देख रेख में करना चाहिए इसका सबसे बड़ा फायदा लगातार इसका सेवन करने से वीर्य के नवीन कीटाणु बनने लगते है वीर्य गाड़ा हो जाता है ,जिन नोजवानो में उत्साह की कमी है उनको भी इसका प्रयोग करना चाहिए .






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