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mal sindoor ke prayog मल्ल सिंदूर के प्रयोग


mal sindoor ke prayog
मल्ल सिंदूर एक आयुर्वेदिक ओषधि हैं जिसका निर्माण बहुत सबधाणी से किया जाता ,अगर इसको बनाने में थोड़ी सी कमी रह जाये तो इसका लाभ होने की बजाए शरीर में बहुत ज्यादा नुक्सान हो सकता हैं .
इसमें शुद्ध पारा , गंधक , रस कपूर , और संखिया मिलाया जाता हैं.






मल्ल सिन्दूर के प्रयोग
मल्ल सिंदूर में संखिया मिला होने के कारण ये बहुत तीक्षण और उषणवीर्य हैं ,अगर आपको पित की अधिकता हैं तो इसका सेवन कभी नहीं करना चाहिए .अगर इसका सेवन करना जरुरी हैं तो एक चौथाई रति से ज्यादा प्रयोग न करें.

ये आयुर्वेदिक एंटीबायोटिक हैं जो खून में से मलेरिआ और हैजा और सिलफिश के कीटाणुओं को ख़तम करने की शक्ति रखता हैं.

इससे रक्त वाहिनिओं में उत्तेजना पैदा होती हैं और हृदय की गति में वृदि होती हैं.

आतशक और सुजाक के मरीज में अगर गंठिया की शिकायत दिखे तो ये बहुत चमत्कारिक असर दिखाता हैं.

पक्षाघात , आम वात , और हर प्रकार के वात रोगों के लिए मल्ल सिन्दूर उत्तम ओषधि हैं.

कफ प्रधान रोगों में जैसे की सन्निपात, हिस्टीरिअ रोग के लिए भी लाभदायक हैं.हिस्ट्रिया का रोगी सात दिन में ठीक हो सकता हैं .

बुढ़ापे की कमजोरी और अस्थमा के मरीज के लिए मल्ल सिन्दूर रामवाण ओषधि हैं ये कफ को शरीर से बाहर निकाल देता हैं



इसके सेवन से भूख लगने लगती हैं लेकिन पित प्रधान व्यक्ति को इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

ये पुरूषों के गुप्त रोगो में भी लाभकारी हैं .हस्तमैथुन से आयी कमजोरी नपुंसकता को जड़ से ख़तम कर देता हैं.



हिस्टेरिअ के मरीज में   बेहोशी दिमाग का सुन्न हो जाना या  बक बक करना कफ की वृद्धि के कारण अगर कफ गले में जम गया हैं, या छाती में जम गया हैं तो इसका सेवन करना चाहिए.

दमे के मरीज को जलवायु परिवर्तन के साथ कफ अधिक परेशान करता हैं कफ निकलने का नाम नहीं लेता फेफड़े कमजोर हो जाते हैं ,ऐसे रोगी को मल्ल सिन्दूर की उचित मात्रा परवाल चंद्र पुट्टी,अभ्रक भस्म,लोह भसम के साथ देने से कफ बाहर निकाल जाता हैं.

पक्षाघात में आधी रती मल्सिंदूर शहद के साथ देना चाहिए

पौरुष वृद्धि के लिए मल्ल सिन्दूर चौथाई रती , छोटी इलाची चूर्ण चार रती मिश्री मिलाकर दूध के साथ देना चाहिए .

इस ओषधि का प्रयोग ज्यादातर पक्षाघात और दमे के मरीज में किया जाता हैं .लेकिन ये बहुत ही उग्र ओषधि हैं कमजोर लोग इसका सेवन न करें ,मल्ल सिन्दूर का सेवन किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की देख रेख में करना चाहिए .अपनी मर्ज़ी या यहाँ वह से सुन कर कोई भी आयुर्वेदिक रसायन प्रयोग न करें


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