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sharad natratri 2020 | sharad natratri kab hai

  sharad natratri 2020 --  17 october - 25 october  तक , नवरात्री के नो दिनो मे सात्विक भगति का बहुत महत्व है ,इन दिनों में की गयी पूजा से आपके तन और मन में एक अलग तरह की अलौकिक शक्ति का संचार होता है ,अगर आपको किसी तरह की कोई ऊपरी बाधा या कोई ग्रह पीड़ित है

natratri 2018

तो सच्चे मन से की गयी भगति से सब कलेश दूर हो जाते है . शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार कई राजा महाराजा युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए या अपने शत्रु को नष्ट करने के लिए भी कई प्रकार के मंत्रोचारण किया करते थे ,

सामान्य जन मनुष्य भी मां दुर्गा की भगति से मन वांछित फल प्राप्त कर सकता है ,किसी कार्य की बाधा, मन वांछित वर प्राप्त करने के लिए , व्यापार वृद्धि , संतान सुख, विवाह में देरी ऐसा कोई काम नहीं जो माँ जगदंम्बा की भगति से न बनता हो .

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नवरात्री पूजन की पूर्ण विधि आडम्बर रहित
इस लेख में आपको माँ भगवती की आराधना के कुछ नियम और उपाय बताय जा रहे जिनसे आपके जीवन में कोई भी परेशानी नहीं रहेगी आप सारी मुश्किलों को पार करने में सामर्थयवान बन जाओगे ,आपके शत्रु आपको परेशां नहीं करेंगे ,आपको स्वपन में भी कोई कलेष नहीं होगा ,घर में आनंद का माहौल रहेगा .

नवरात्री में माँ वैष्णो के नो रूपों की पूजा होती है ,माँ की आराधना करने के लिए आपको तन और मन से पवित्र होकर माँ की चौकी सजानी चाहिए ,


माँ की भगति का समय सुबह 4-6 बजे के बीच hota है उसके बाद की गयी भगति , तामसिक भगति कहलाती है, इस लिए सुबह 4 बजे उठ कर अपने तन को पवित्र कर के माँ का आसान लगावे ,माँ के आसान में लाल बस्त्रों का प्रयोग करना चाहिए ,

उसके बाद माँ की सूंदर प्रतिमा आसन पर सजा लें ,माँ की आराधना में आरती की थाली जरूर सजालें थाली में हर प्रकार के सूखे मेवे , गरी गोला, शुहारे , बादाम , किशमिश ,मिश्री एक कांच की कटोरी में रख लें .

माता के भोग के लिए ताजा फल सेव केले और सूखे सेव का मेवा भी रख सकते है .माँ की ज्योति के लिए अगर हो सकते तो शुद्ध देसी घी का प्रयोग करना चाहिए ,डिब्बे वाले घी का प्रयोग कभी न करें ,अगर शुद्ध घी न मिले तो सरसों के तेल का दीपक भी जला सकते हैं .धुप अगर वती से सुगन्धित वातावरण करें और इत्र का छिड़काब जरूर करें

 एक कलश मे सूखा नारियल लाल कपडे में लपेट कर रखें ,एक चौड़े मुँह बाले बर्तन में थोड़ी सी गीली मिटटी डाल कर उसमे जों की खेती कर  उसको हरे पत्तों से ढक कर रखे .इस तरह से माँ की चोंकी सजा कर सामने बैठ जाएँ ,

ज्यादतर लोग नवरात्री के  नो दिनों में माँ के व्रत भी करते है ,कई लोग एक समय भोजन खाते है कई लोग सिर्फ फलाहार पर रहते है ,कुछ लोग ऐसे भी है जो नो दिनों तक कुछ नहीं खाते बहुत सारे लोग सिर्फ एक समय फल खाते हैं ,

ये नियम माँ के बनाये हुए नहीं है माँ कभी नहीं चाहती किसी बच्चे को कष्ट हो ,व्रत का मतलब भूखे रहना नहीं होता व्रत का मतलव होता है संकल्प करना ,

संकल्प करने के लिए एक हाथ में गंगा जल लेकर संकल्प करें के -हे माँ मैं इतने दिनों तक तेरी आराधना करूँगा और जल को भूमि पर डाल दें.आपके मन में जो इच्छा हो माँ से प्राथना करें के मेरी ये इच्छा पूर्ण हो जाये ,मन से सकल्प करें के मैं नो दिनों तक निश्चित समय पर आपकी भगति करूँगा या करुँगी उसके बाद  एक माला जय वैष्णो माँ का जाप करें .

अगर आप जाप नहीं कर सकते तो कम से कम आधा घंटा माँ के ध्यान में बैठे रहे और मन ही मन जय माता की- जय दुर्गा माता की बोलते रहें, कभी भी नवार्ण मन्त्र का जाप गुरु दीक्षा के बिना न करें ,

जाप पूरा होने के बाद माँ को भोग लगाकर सूखा मेवा छोटी कन्याओं में बाँट दें सारा दिन आदि शक्ति की भगति में मगन रहें कोई ऐसा काम न करें जिससे आपके मन में विकार पैदा हो.

संध्या बेला में फिर माँ की चोंकी के सामने आधा घंटा ध्यान लगाएं या जाप करें उसके बाद सारा परिवार मिल कर माता की आरती और भजन गाये और प्रसाद बांटें .

जो कामना या इच्छा आपकी है उसकी पूर्ति के लिए नीचे दिए गये कुछ मंत्रो में से किंसी एक का जाप करें

अच्छी और शुशील पत्नी पाने के लिए इस मंत्र का जाप करें

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।

दरिद्रता दूर भगाने के लिए इस मन्त्र का जाप करे

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो: स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्रयदु:खभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाद्र्रचिता।।

दुखों से छुटकारा पाने के लिए इस श्लोक का जाप करें

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च।।

अज्ञात भय स्वपन भय के नाश के लिए ये श्लोक जपें

यस्या: प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च।
सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु।।

रोगों के नाश के लिए ये श्लोक है इसका जाप करें

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।

पारिवारिक सौहार्द के लिए

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते ।।

सब पापों की क्षमा याचना के लिए

 ऊँ जयन्ती मङ्गलाकाली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते ।


आठ दिन तक आराधना करने के बाद नोवे दिन मीठा हवन जरूर करें या किसी योग्य पंडित से करवाएं ,नो कन्याओं का पूजन करें जिनकी उम्र 6 साल से कम हो ,अगर 6 साल से कम उम्र की कन्या न हो तो ,11 साल से ज्यादा उम्र की कन्या का पूजन न करें.

अगर आप इन नो दिनों में सच्चे मन से अखंड ज्योति जला कर व्रह्मचर्य का पालन करते हुए भूमि शयन करते है माँ की चोंकी के सामने तो स्वपन में आपको माँ के दर्शन हो सकते है यां माँ की ज्योति जलती हुयी नज़र आ सकती है , अगर आपको माता का कोई अनुभव हो जाये स्वपन में तो समझ लेना  आपकी प्राथना माँ ने सुन ली आपकी मोकामना पूरी जरूर होगी .

विकारी , पापी , पाखंडी, आडंबरपूर्ण व्यव्हार , क्रोधी ,कामी ,चुगली निंद्या करने बाले और लोभी लोग किसी भी देवी देवता की भगति न करें अन्यथा हानि हो सकती है ,पहले योग प्राणायाम और ध्यान से अपने मन को पवित्र कर लें फिर किसी भी देवता की भगति में सलग्न हो सकते है.

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