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Thursday, July 30, 2020

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आज हम आपको अश्वगंध चूर्ण  बनाने  की विधि बताने वाले है  ,इस चूर्ण का प्रयोग बच्चे, बूढ़े ,जवान,स्त्री , स्टूडेंट सबसे लिए लाभदायक , कहते है  अश्वगंधा का सेवन करने से उपयोग करता के शरीर में घोड़े जैसी चुस्ती फुर्ती आ जाती है |
  अश्वगंधा चूर्ण  फायदे और नुकसान


अश्व्गन्धादि चूर्ण कैसे बनाते है

अशवगंध 100  ग्राम
विधारा 100  ग्राम

इन दोनों औषधिओं  को ग्राइंडर में पीस लें या बाजार से पिसवा कर  एयरटाइट डिब्बे  में सुरक्षित कर लें .


मात्रा और सेवन  विधि 
1 ग्राम से 2 ग्राम सुबह शाम दूध  या पानी के साथ सेवन करें अश्वगंधा चूर्ण देर से पचता है | कई बार इसके सेवन से भूख कम हो जाती है ,पेट भरा हुआ महसूस होता है . इस लिए जितना कम  मात्रा में प्रयोग करें उतना ज्यादा बेहतर लाभ  मिलता है .

अगर अश्वगंधा चूर्ण पचाने  में असमर्थ है तो अश्वगंधारिष्ट सेवन आपके लिए उचित रहेगा .दोनों के फायदे एक जैसे है .हालाँकि अश्वगंधारिष्ट ज्यादा फायदेमंद  मंद साबित होता है


  अश्वगंधा चूर्ण के फायदे और नुकसान 

अश्वगंधा का सेवन चूर्ण और अरिष्ट के रूप में किया जाये तो बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है इससे कई रोगो से छुटकारा पाने की शक्ति आ जाती है शरीर में रोगप्रतिरोधक शक्ति का संचार होने से गंभीर से गंभीर रोग भी शरीर में टिक नहीं पता , किसी लम्बी बीमारी के बाद अगर शरीर कमजोर हो जाये तो अश्वगंधा का प्रोग से चटकारी लाभ मिलता है .

अश्वगंधा का सबसे ज्यादा असर वीर्य वाहिनी नाड़िओं पर , बात बहिनी नाड़िओं पर ,मस्तिष्क और हृदय की नाड़िओं पर पड़ता है

1) -इस चूरन से सेवन से पुरुषों में वीर्य विकार के सभी रोग ठीक हो जाते है

2 ) - धात  रोग में अकेले अश्व्गन्धादि चूरन से रोगी ठीक हो जाता है

3 ) - पेशाव में चर्वी आने  ( अल्बुमन )  व्यक्ति का शरीर धीरे धीरे सूखने लगता है , शरीर इमें गर्मी बढ़ जाती है , कुछ खाया पीया नहीं लगता ,ऐसे रोगी को कुछ महीनो तक लगातार अश्वगंधा का सेवन करना चाहिए .


4 ) - शीघ्र पतन की बीमारी शादी शुदा जिंदगी को बर्बाद कर सकती है , इसका मात्र एक इलाज है गर्म तासीर की चीजे न खाये. और अश्वगंधा चूरन दूध  के साथ 40  दिन तक प्रयोग करने से लाभ होता है .

5 ) - मसाने की गर्मी बढ़ जाने से वीर्य पानी जैसा पतला हो जाता है  इस अवस्था में रोगी  अश्वगंधा चूरन का सेवन करे तो शरीर में नयी ऊर्जा   का संचार होने लगता है .वीर्य माखन की तरह गदा हो जाता है

6 ) - शुक्राणुओं की कमी को दूर करने में अश्वगंधा चूरन का कोई जवाब नहीं .लगातार तीन महीनो तक प्रयोग करके लाभ देखें

7 ) - स्वपन दोष के रोगी के लिए अश्वगंधा चूरन किसी संजीवनी से कम नहीं २- ५ ग्राम सभा शाम दोष के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है . स्वपनदोष बंद हो जाता है .

8 ) -  दुबले पतले लड़के या लड़कियां अगर बजन बढ़ाना चाहते है तो अश्वगंधा चूरन या अश्वगंधारिष्ट  का सेवन करे शरीर मोटा होगा बजन बढ़ जायेगा .चेहरा लाल और कांतिवान बन जाता है .

 9 ) - इसके सेवन से दिमागी कमजोरी  यादाश्त की कमी तंत्र तंत्रिका ( nervous system  )का कोई भी रोग जैसे की  शरीर का कांपना पार्किनंसों  नस नाड़िओ की कमजोरी के कारन चलने फिरने में असहाय होना , आदि रोग ठीक हो जाते है .

10 ) - स्त्रिओं में बाँझपन को ठीक करके गर्भ धारण योग्य बना देता है .

11 ) - स्त्रिओं में माहवारी ठीक से ना आए सर घूमना , चकर आना सवभाव   चिड़चिड़ा हो जाये तो अश्वगंधा का सेवन करनवाने चाहिए .

 12 ) - कोई भी रोग हो जाये तो अश्वगंधा के सेवन करने से रोगप्रतिरोधक शक्ति का विकास हो जाता है . रोगाणु , विषाणु , जीवाणु तीनो व्याधिया शरीर  से दूर  हो जाती है .



final words : - 
आप अश्वगंधा का सत्व निकाल  कर उसका सेवन करते है तो ये शरीर को बहुत ज्यादा नुक्सान करता है ी अश्वगंधा  सत्व  दुस्प्रभाव किडनी पर ज्यादा पड़ता  , गुर्दे की पथरी , पेशाव में जलन , और भी कई व्याधिया आ सकती है 

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