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आसव अरिष्ट की सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में asva arishta ayurvedic medicine in hindi

आयुर्वेद में आसव और अरिष्ट का बहुत महत्पूर्ण भाग में इनके अवभाव    कई असाध्य रोगो का इलाज नहीं किया जा सकता ,आज के इस प्रकरण में हम जानेगे की  आसव और अरिष्ट में क्या अंतर् है , आसव अरिष्ट की सम्पूर्ण लिस्ट और उनके नाम गुण उपयोग ,मात्रा सेवन विधि  , और इनके निर्माण  में किन किन दर्व्यों का प्रयोग किया जाता है उन सब की विस्तृत जानकारी दी जाएगी .

ayurvedic asava arisht in hindi



आसव अरिष्ट  किसे कहते है -

आसव अरिष्ट में क्या अन्तर होता है . हर एक ख़ास अरिष्ट या आसव बनाने के लिए स्वच्छ जल में आयुर्वेदिक जड़ी बूटिओं  को मिलाकर कुछ दिनों के लिए पात्र में रखा जाता है , ताकि उन्हें  सन्धान किया जा सके.इसे ही आसव या अरिष्ट कहते है .

आसव  बनाने के लिए  ओषधियों और दर्व्यों का बिना कवाथ बनाये ही सन्धान किया जाता है 

 अरिष्ट बनाने के लिए सभी ओषधिओंका पहले कवाथ किया जाता है फिर उसमे साधान किया जाता है      
अक्सर आप लोग अपने घर में आसव का प्रयोग करते होंगे ,लेकिन क्या आपको पता है आसव पीने की सही विधि क्या है , अगर आपने आसव या अरिष्ट सेवन की मात्रा और अनुपात का ध्यान न रखा तो लाभ की वजाये हानि हो सकती है 

आसव और अरिष्ट जितने पुराने होते है ,उनके गुणों में उतनी ज्यादा वृद्धि हो जाती है , वशर्ते उनको बनाने की सही बिधि का ध्यान रखा गया होना चाहिए .एक बार सही विधि से बा आसव काम से काम 20  साल तक प्रयोग किया जा सकता है . अरिष्ट जितने पुराने होते जाते है वो उतने ही स्वादिष्ट रुचिकर , शीघ्र लाभ करने  वाले हो जाते 

अरिष्ट और आसव के फायदे 

वैसे तो आसव के बहुत चमत्कारी गुण होते है , जैसे की इसके सेवन से हसरीर में नयी ऊर्जा महसूस होती है ,खाया पिया शरीर को लगने लगता है, पाचन शक्ति बाद जाती है ,पेट में वायु का बनना बंद हो जाता है ,मूत्र विकार और वृक आदि दोष समापत हो जाते है 

आसव अरिष्ट सेवन विधि और मात्रा 

 अरिष्ट में सन्धान और कवाथ आदि प्रक्रियाओं  का प्रयोग किया जाता है और और पुराण होने के कारण इसमें तीक्ष्णता उत्पन हो जाती है , इस लिए आसव आदि को सेवन करने का सही विधान है  उसमे बराबर मात्रा में या दोगुने मात्रा में पानी मिलाकर सेवन किया जाये  

सामान्य लोगो को 15 - 20  ml  

बजुर्गों को  10  मल 

छोटे बच्चों को 5  ml  

और दूध पिटे बच्चो को 15  से 20  बूँदें असवारिष्ट की देनी चाहिए 
बराबर मात्रा में पानी मलाकर .

असवारिष्ट  सेवन करने की सही विधि ये है की जब भी असवारिष्ट पियें  आपके मसूड़ों को न लगे सीधा गले से पेट में उतर जाये .

परहेज और पथ्यापथ्य
आयर्वेद में एक कहावत है इलाज़ से परहेज अच्छा , तो जिन रोगो के इलाज़ के लिए आप असवारिष्ट  का सेवन कर रहे है वैद्य द्वारा वताये गए उन सब परहेजों का आपको पालन करन चाहिए तभी आपको उचित लाभ होगा 

अरिष्ट




अश्वगंधारिष्ट 

ऐलध्यारिष्ट


कुटजारिष्ट 

खदिरारिष्ट 

चाव्यकारिष्ट 

 जम्बीरद्राव

जीरकदरारिष्ट

तरकारिष्ट
त्रिफलारिष्ट

दशमूलारिष्ट

दंति अरिष्ट

द्राक्षारिष्ट 

देवदाव राद्यरिष्ट 

धात्र्यरिष्ट

धान्यपंचकारिष्ट 

पर्पटाद्यरिष्ट

अर्जुनारिष्ट ( पार्थयारिष्ट )

पुननर्वारिष्ट

फलारिष्ट

बलारिष्ट

बबूलारिष्ट

वासरिश्त 

मध्वारिष्ट

महामंजिष्ठाद्यारिष्ट 
   
मृतसंजीवनी सूरा

मुस्तकारिष्ट

मंडूराध्यारिष्ट

रोहितकारिष्ट 

सारस्वतारिष्ट 

सुन्दरीकलप

आसव

अंगूरसाव

कर्पूरसाव

कालमेघासव

कुमारायसव १

कुमार्यासव २

कुमारायसव ३

कुमारायसव ४

चंदनासव

चितचंदिरासव

द्राक्षासव

द्राक्षासव २

नारिकेलासव

पत्रंगासव

पिप्पल्यासव

विडंगासव

भृंगराजसव

मस्तवासव

मृगमदासव

लवंगसाव

लोध्रासव

लोहासव

श्रीखंडासव

सरिवाद्यासव


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