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कनकासव की पूर्ण जानकारी हिंदी में | kankasav in hindi uses

कनकासव की पूर्ण जानकारी  हिंदी  में | kankasav in hindi uses  and price कांकसाव और कंकारिष्ट दोनों अलग औषधियाँ है  जहा कंकारिष्ट में खैर सार प्रयोग किया जाता है , दूसरी और  कांकसाव में  धतूरे के सर्वांग का प्रयोग किया जाता है .दोनों  का प्रयोग भी अलग अलग रोगों में किया जाता है .
kankasav in hindi uses



कांकसाव के लाभ :-

ज्यादातर इसका प्रयोग दामे के रोगी को किया जाता है दमें की बीमारी के कारन बलगम छाती में जम जाता है ,रोगी खस्ता रहता है लेकिन कफ बहार नहीं निकलता ,इस अवस्था में कांकसाव का सेवन करवाने से कफ ढीला होकर अपने आप निकल जाता है .

किसी  किसी रोगी को बहुत तेज खांसी है और किसी भी दवाई से रुकने का नाम नहीं ले तो कांकसाव का सेवन. लाभदायक होता है .

कांकसाव का सेवन सबधाणी पूर्वक करना चाहिए क्यों की इसके सेवन से स्वाश नालीका की श्लैषम त्वचा शिथिल हो जाती है .

दामे के दोरे में  कांकसाव के स्वान से स्वासनालिका ढीली पढ़ जाती है और कफ आसानी से निकल जाता है .


कंसकसाव कैसे बनाते है 

कांकसाव बनाने के लिए धतूरे की जड़ , फूल , पत्ते , शाखा  सभी मिलकर ५० ग्राम
बसा की जड़ 50 ग्राम
मुलेठी 15 ग्राम
पीपल 15 ग्राम
नागकेसर 15 ग्राम
सोंठ 15 ग्राम
तालीस पत्र 15 ग्राम
पुराना गुड़ 400 ग्राम


इन  औषधिओ को 2.५ लीटर पानी में डाल कर  सन्धान लगाएं ३० दिनों में आसव त्यार हो जायेगा .अगर आपको इस लेख के विषय  में कोई जानकारी चाहिए तो कमेंट  करें . इस पोस्ट में बताई गयी औषधि का प्रयोग करने से पहले किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श  जरूर करें कांकसाव के किसी भी फायदे या नुक्सान की गारंटी festgoodlife.कॉम की नहीं है





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