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Thursday, September 10, 2020

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कमलाक्षादि चूर्ण , kamlakshadi churan  अकसर  नौजवान  लड़के जवानी की उम्र आते ही आप्राकृर्तिक तरीके से वीर्य नाश करते है जिसकारण उनके शरीर में रस रक्त आदि धातुओं की कमी हो जाती है शरीर दुर्बल और आशय होने लगता है . आँखे के आगे अँधेरा छाने लगता है चेहरा चिपका हुआ दिखने लगता है .इन सब व्यधिओं को दूर करने के लिए कलाक्षादि चूर्ण लाभदायक सिद्ध होता है लेकिन इस चूर्ण का सेवन सिर्फ सर्दिओं में करना चाहिए . इस चूर्ण की कीमत बहुत ज्यादा है इस लिए किसी अच्छे और जानकार आयुर्वेदिक फार्मेसी   से इस चूर्ण को खरीदें

कमलाक्षादि चूर्ण बनाने की विधि

कमलाक्षादि चूर्ण ब्वनाने की विधि :-

कमल गट्टा 70  ग्राम
जायफल 20  ग्राम
केसर 10  ग्राम
तेजपात 10  ग्राम
शतावरी 20  ग्राम
अश्वगंध 20  ग्राम
सफ़ेद मूसली 20  ग्राम
वंशलोचन 10 ग्राम
सलाम पंजा 20  ग्राम
छोटी इलाची के बीज 10  ग्राम
रूमी मस्तंगी 10  ग्राम
पिपला मूल 10  ग्राम
कबाब चीनी 10  ग्राम

इन सव सामग्रीओं को कूट पीस कर बारीक चूर्ण बना लें और किसी साफ शीशी में डाल कर रख लें .

कमलाक्षादि चूरन के फायदे :-

1 ) - कमलाक्षादि चूर्ण का सेवन सर्दिओं के मौसम में किया जाये तो अद्भुत शक्ति प्रदान करता है .

2 ) - पुरुषों के लिए उत्तम बाजीकरण औषधि है .

3 ) - हाथ पैर  सुन होना शरीर में रस आदि धातुओं की कमी दूर करके नयी  ऊर्जा प्रदान करता है .स्वस्थ्य व्यक्तिओं  के लिए भी उत्तम टॉनिक है .

4 ) - थोड़ा सा काम करने पर हाफंने लगते है आँखों के आगे अँधेरा छा जाना  आदि कमजोरी के लक्षण दूर हो तो कमलाक्षादि चूर्ण का सेवन जरूर करें

5 ) - जवानी के दिनों में अधिक वीर्य पात करने से पुरुषों का शरीर सूखा हड्डीओं का ढांचा दिखने लगता है शरीर को हष्ट पुष्ट  बनाने के लिए इस चूरन उपयोग करें .

6 ) - नपुंसकता , शीघ्रपतन, कामिच्छा की कमी , उत्तेजना में कमी आदि जितने भी गंभीर रोग है उन   
 सबको   दूर करने के लिए इस चूर्ण का सेवन करना चहिये.



 कमलाक्षादि चूर्ण के नुक्सान :- 

जहा तक देखा जाये आयुर्वेदिक औषधियां अंग्रेजी दवाईओ की उपेक्षा कम हानिकारक होती है , लेकिन फिर भी बहुत सारी आयुर्वेदिक रसायन का अगर गलत मात्रा में प्रयोग कर लिया जाये तो शरीर को बहुत ज्यादा नुक्सान हो सकता है . कुछ आयुर्वेदिक दवाईओं का प्रयोग किसी वैद   की देख रेख में करना चाहिए


सेवन विधि :-

3  ग्राम कमलाक्षादि चूर्ण को 10 ग्राम गाय  के घी में भून कर 250  ग्राम ग्राम दूध मिला कर उबालें , एक आध उबाल  आने के बाद आंच से उतार कर हल्का गुनगुना पी लें , अपने स्वादानुसार मिश्री या चीनी जरूर मिला लें  .


टिप्स :- 
किसी भी औषधि का सेवन करने से पहले अच्छे डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें ,हम किसी भी ओषधि का विज्ञापन नहीं देते इस लेख में दी गयी जानकारी आपकी आयुर्वेद के प्रति जिज्ञासा को शांत करने के लिए है .और आपकी जानकारी को बढ़ाने के लिए इस लेख को लिखा गया है 

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