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Saturday, October 10, 2020

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गंगाधर चूर्ण ( gangadhar churan ) दस्त , ( gangadharchurna used for ) पेचिस और संग्रहणी में लाभकारी . दस्त रोकने के लिए आयुर्वेदिक औषधियों में से एक है गंगाधर चूर्ण . gangadhar churan  के  सेवन से आंते  मजबूत हो जाती है . गंगाधर चूर्ण से बार  बार  diarrhea  आने  की शिकायत ठीक  होती है .गंगाधर चूर्ण शुद्ध आयुर्वेर्दिक दवाई है जो पेचिश , लूज मोशन , sprue आदि रोगो के लिए प्रयोग की जाती है , संग्रहणी और ग्रहणी रोगो में आंते कमजोर  हो जाती है .ऐसी स्थिति में इस चूर्ण का सेवन करना चाहिए .


gangadhar churan in hindi


हर प्रकार के dysentery   और दस्त जैसे की पतले दस्त , आम के साथ दस्त . दस्त के समय पेट में ऐंठन , आदि सभी रोग ठीक होते है .अधिक दस्त आने पर गुदा मार्ग में जखम (fissure) हो जाते है ,फिशर रोग को ठीक करने के लिए गंगाधर चूर्ण का सेवन कुछ दिनों तक लगातार करना चाहिए .

कई लोगो को शिकायत होती है की कभी उनको कबज हो जाता है , कभी पतले दस्त होते है और कभी सामान्य दस्त होते है  , ऐसे मरिओजोन को गंगाधर चूर्ण के सेवन से शीघ्र लाभ मिलता है .ये चूर्ण वात और कफ का नाश करता है , आंतो में गर्मी उत्पन होती है जिससे दस्त में ये चूर्ण वात और कफ का नाश करता है , आंतो में गर्मी उत्पन होती है जिससे दस्त में बांध लग जाता है . 

शरीर को डीटॉक्सिफाय   करने और आम को जड़ से कहत्म करने में भी गंगाधर चूर्ण लाभकारी होता है .

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गंगाधर चूर्ण के फायदे :-

1 .gangadhar churan  चूर्ण दर्द निवारक और सूजन कम करने वाला भी  है अर्थात पेट दर्द को ठीक  करने में भी इस चूर्ण सेवन किया जा सकता है .

2 . पेट की गैस को ख़तम करने के लिए gangadhar  का लाभ लिया जा सकता है ये चूर्ण पेट की गैस को ख़तम करता है .

3. कई बार भोजन ठीक से पचता नहीं और आंतो में ही सड़ने लगता है gangadhar churana के सेवन से पाचन क्रिया में सुधर होता है , पाचन क्रिया सक्रिय होकर भूख लगने लगती है .

4. गंगाधर चूर्ण  हर तरह के पेचिस और दस्त में उपयोगी सिद्ध होता है 

5. गंगाधर चूर्ण के सेवन से बजुर्गों को  बार बार पेशाव आने की शिकायत ठीक हो जाती है .पेशाव में जलन और पीठ के निचले हिस्से में दर्द को थी करता है .

6. गंगाधर चूर्ण गुर्दे  और मूत्राशय की शिकायत का इलाज़ करता है .

7. पेट की आंतो के हर प्रकार की रुकावट और रोग को ठीक करने में gangadhar  चूर्ण का सेवन करवाया  जाता है .

गंगधार चूर्ण की सामग्री ( वृहत  ):-

बेलगिरी  10  ग्राम 

सिंघाड़ा की पत्ती 10  ग्राम 

दाड़िम की पत्ती  10  ग्राम 

नगर मोठा 10  ग्राम 

अतीस 10  ग्राम 

राल 10  ग्राम 

धय के फूल 10  ग्राम 

मिर्च 10  ग्राम 

सोंठ 10  ग्राम 

दारुहल्दी 10  ग्राम 

चिरायता 10  ग्राम 

नीम की छाल 10  ग्राम 

जामुन की छाल

रसोंत 10  ग्राम 

इन्दरजो  10  ग्राम 

पाठा 10  ग्राम 

मंजीठ 10  ग्राम 

खस 10  ग्राम 

मोचरस 10  ग्राम 

शुद्धभान्ग 10  ग्राम 

भांगरा 10  ग्राम 

  

गंगधार चूर्ण की सामग्री ( लघु  ):-

नागरमोथा  10  ग्राम 
धाय के फूल 10  ग्राम 
बेलगिरी 10  ग्राम 
पठानी   लोथ 10  ग्राम 
मोचरस 10  ग्राम 
इन्दर जों  10  ग्राम 

सभी सामग्रीओं को कूट पीस   कर बारीक   चूर्ण बनाकर कांच की शीशी में डाल कर रखे लें .

सेवन विधि :- 

दस्त के रोगो को सुबहा शाम शहद के साथ 500  mg गंगधार चूर्ण चटाएं   .गंगाधर चूर्ण , दस्त पेचिस और संग्रहणी में फायदेमंद होने के साथ साथ दर्दनिवारक भी है .



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