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gokshuradi churan ke fayede शीघ्रपतन - शुक्राणों की कमी और नपुंसकता में लाभकारी [ गोक्षुरादि चूर्ण ]

 गोक्षुरादि चूर्ण वृष्य ( बल बढ़ाने वाला ) इसके सेवन से शरीर में शक्ति की वृद्धि होती है .परुषों  के लिए ये कामोत्तेजक का काम करता है . वीर्य का पतला पण होने पर स्त्री की कल्पना मात्र से वीर्य पानी की तरह निकल जाता है .इस अवस्था में शुक्र अतिशीघ्र संखलित हो जाता है जिससे पुरुष  वैवाहिक जीवन का आनंद नहीं उठा सकते और बात तलाक़ तक पहुँच जाती है . वीर्य में शुक्राणुओं में कमी होने पर दम्पति संतान सुख से भी वंचित रह जाते है .


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इस रोग से छुटकारा पाने केलिए पुरुष कई  तरह की विषैली दवाईओ का सेवन भी कर जाते है जिससे कई दूसरे रोग शरीर को जकड लेते है . जिस कारन शरीर पहले से भी ज्यादा कमजोर और निर्बल हो जाता है .वीर्य से सम्बंधित कोई भी रोग होजाने पर गोक्षुरादि चूर्ण का सेवन करना चाहिए ये चूर्ण आयुर्वेदिक होने के कारन इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है. इसका कोई दुष्प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ता .

गोक्षुरादि चूर्ण के लाभ :-

1. सम्भोग से एक घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने पर देर तक आनंद प्राप्त किया जा सकता है .
2. गोक्षुरादि चूर्ण के सेवन से वीर्य का पतलापन दूर होकर वीर्य मक्खन   की तरह गाड़ा हो जाता है .
3. गोक्षुरादि चूर्ण के नियमित सेवन  शीघ्रपतन को ख़तम  कर और उत्तेजना में वृद्धि करता है .
4. गोक्षुरादि चूर्ण के सेवन  से  शरीर में पुष्टि और वीर्य मि व्रिधिओ होती है .
5. धातु रोग और स्वपनदोष का मुख्य कारन मसाने की गर्मी होता है गोक्षुरादिचूर्ण मसाने की गर्मी को ख़तम कर वीर्य को गाढ़ा करता है .
6.अश्लील दृश्य देखने से वीर्य वाहिनी  नाड़ीओं  में कमजोरी आ जाती है जिससे वो वीर्य को रोक कर रखने असमर्थ हो जाती है . इस चूर्ण के सेवन से वीर्य वाहिनी नाड़ियां शक्तिशाली बन जाती है  और वीर्य को रोकने में समर्थ हो जाती है.
7. शीत  वीर्य होने के कारन गोक्षुरादिचूर्ण मूत्रल  है , इसके सेवन से मूत्र स्वच्छ और निर्विकार आता है. 
8. गोक्षुरादि चूर्ण के सेवन से स्तम्भन शक्ति में विर्धि होती है .
9.शीघ्रपतन और  इंद्री में उत्तेजना की कमी के कारन जो पुरुष वैवाहिक जीवन का आननद नहीं ले प् रहे है उनको इस चूर्ण का सेवन करना चाहिए .
10.गोक्षुरादि चूर्ण के सेवन से यौनशक्ति में वृद्धि होती है, इसके इलावा ये बलवीर्य में वृद्धि करता है और शरीर को पुष्ट करता है और कामवासना को जागृत करता है अर्थात कामोत्तेजक है .

गोक्षुरादि चूर्ण की सामग्री :- 

गोखरू  40  ग्राम 

तालमखाना  40  ग्राम 

शतावर  40  ग्राम 

कोंच के  बीज  40  ग्राम 

नागबला 40  ग्राम 

अतिबला 40  ग्राम 

इन सब सामग्रीओ को पंसारी की दूकान से खरीद कर अच्छी तरह सूखा और फिर बारीक पीस कर  साफ़ और सुखी कांच की डिब्बी में डाल कर रखे ऊपर से ढकन बंद कर ले. 

उपयोग विधि :- 

रात को सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ 2 ग्राम गोक्षुरादि चूर्ण का सेवन करें .  लगातार तीन महीने तक इस चूर्ण का सेवन करने से शरीर में अद्भुत शक्ति का संचार होने लगता  है. शादी शुदा जीवन से निराश हो चुके विवाहिक पुरुष के लिए  ये चूर्ण सन्जीनि का काम करता है .शीघ्र लाभ के लिए इस चूर्ण का सेवन दिन दो बार सुबहा और शाम को करना चाहिए .


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