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chitarakadi vati fayede or nuksan | चित्रकादि वटी फायेदे और नुकसान

 चित्रकादि वटी  फायेदे और नुकसान chitarakadi vati fayede or nuksan  ,चित्रकादि वटी किस रोग में खाते हैं , पेट के रोग में  चित्रकादि वटी के लाभ . चित्रकादि वटी आयुर्वेदिक ओषधि है ,इस लिए इसका साइड इफ़ेक्ट तो नहीं है लेकिन कोई भी ओषधि बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं खानी चाहिए ,



chitarakadi vati fayede or nuksan
चित्रकादि वती के औषधीय गन और लाभ बताने जा रहे है ,भविष्य में आपको कभी पड़े तो आप बाबा राम देव की शॉप से भी खरीद सकते है , इलावा बैद्यनाथ ,जैसी बड़ी कोम्पनिओ द्वारा भी निर्मित की जाती है.

चत्रकादि वटी के लाभ :-
२१वीं सदी में लाइफ स्टाइल इम्प्रूव हो चूका है , की जो भी ूल जलूल मार्किट में मिलता है उसको अपने पेट ठोसते चले जाते है , के स्वाद के चलते लोग अपने पेट को अस्वस्थ कर रहे है ,जरुरी नहीं है जो चीजें खाने में स्वादिष्ट हो वो स्वास्थ्य की दृष्टि से सही हों।

विरुद्ध आहार करने पर कई बार लूज मोशन लग जाते है ,जिनका उपचार लोग किसी डॉक्टर से करवाते है परन्तु उसके बाद भी पेट पूरी तरह से भोजन को पचाने में असमर्थ हो जाता है , डीसेंट्री और लूज मोशन , होने के बाद पेट की अंतड़ियाँ कमजोर हो जाती है जिस कारन अमाशय बिगड़ जाता है , जो भी खाते सही से हजम नहीं होता ,

अर्थात , खाये हुए भोजन को पचने में और परिपाक करने में पेट की अंतड़ियाँ असमर्थ हो जाती हैं , जिस कारन आंव युक्त दस्त शुरू हो जाते है , थोड़ा थोड़ा अध् कच्चा दस्त , तीन चार वार आ सकता है ,इसके कुप्रभाव से भोजन के पौष्टिक तत्व शरीर को नहीं लगते रोगी का बजन दिन प्रति दिन गिरने लगता है ,भूख कम हो जाती है , शरीर में लोह आती तत्वों की कमी हो जाती है

ऐसी स्थिति में चित्रकादि वती का सेवन करने से कुछ ही दिनों में लाभ दिखने लगता है , ये वटी अमाशय की अग्नि को प्रदीप्त करती है जिस से भोजन पचने लगता है ,रोगी को इसका सेवन पानी के साथ करना चाहिए ,पेट की अंतड़ियाँ भोजन को अच्छी तरह पचाती है और परिपाक करती हैं ,

एक दो हफ़्तों में व्यक्ति स्वस्थ और कांतिवान हो जाता है कारन ,वो जो भी अन्न खायेगा उसके पौष्टिक तत्व शरीर में समाहित हो जाते है , जिस आम बोल चाल [खाया पिया लगने लगता है  ] ,में कहते है

लाभ आंव का बनाना बिलकुल बंद हो जाता है , पाचन शक्ति में सुधार हो जाता है ,जिनके पेट में वायु रुक जाती है जिस कारन पेट का भारीपन और सिर का भारीपन महसूस हो रहा हो तो भी इसका सेवन करना उचित है ,इसके सेवन से अपान वायु का विसरजन ठीक से होने लगता है

चित्रकादि वटी बनाने में इन जड़ी वुटिओं का उपयोग किया जाता है :-
  1. घी में सेंकी हुयी हींग
  2. चित्रकमूल की छाल
  3. सोंचार नमक
  4. काला नमक
  5. सांभर नमक
  6. छोटी पीपल
  7. सेंधा नमक
  8. काली मिर्च
  9. सज्जीखार
  10. पीपलामूल
  11. अजमोद
  12. यवक्षार
  13. चव्य
  14. सोंठ


प्रत्येक ओषधि समान भाग लेकर वारीक पाउडर बना लें उसके बाद दाड़िम के रस में एक दिन तक मर्दन करें फिर चने के बराबर गोलियां बना कर छाया में सूखा लें ,

सेवन विधि :-
किसी यज्ञ वैद्य के परामर्श के बाद दो गोली सुबह और दो गोली शाम को पानी के साथ सेवन करें। यां एक गोली सुबह एक गोली दोपहर और एक गोली शाम को भोजन खाने के आधा घंटा बाद पानी के साथ लें. चित्रकादि वटी के लाभ ही लाभ हैं इसका नुक्सान कोई भी नहीं ,

प्रेगनेंसी में सेवन करना हो तो गयनोकोलॉजिस्ट के द्वारा प्रेस्क्रिबे करने के बाद करें ,शुगर मरीज भी इसका सेवन कर सकते है , इसमें ऐसी कोई भी जड़ी यां वूटी नहीं है जिसके कारन नींद आए फिर भी गाड़ी चलाते समय इस ओषधि का सेवन न करें

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