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कालमेघासव के फायदे kalmeghasav ke fayede in hindi

 कालमेघासव के फायदे kalmeghasav ke fayede in hindi कालमेघासव जानकारी हिंदी में . मलेरिआ बुखार पीलिया और शरीरिक शुद्धिकरण  में लाभकारी कालमेघासव में गिलोय की प्रधानता होने के कारण इसका प्रयोग मलेरिआ बुखार , टाइफाइड बुखार ,जीर्ण बुखार  सभी प्रकार के ज्वर और बुखार में किया जा सकता है परन्तु  कालमेघासव का प्रयोग ज्यादातर मलेरिआ के बुखार और पीलिया  में किया है . जब सभी औषधीय बुखार को रोकने में असफल हो जाये तो इस औषधि का प्रयोग कर के देखना चाहिए . इसके सेवन से बुखार का समूल नाश हो जाता है .

kaalmeghasav in hindi

कालमेघासव की सामग्री kalmeghasav ingredient in hindi 

  1. कालमेघ  5  किलो 
  2. गिलोय    1  किलो 
  3. सप्तपार्ज   1  किलो 
  4. कुटकी   1  किलो 
  5. करंज पंचांग   1  किलो 
  6. कुटज छाल   1  किलो 
  7.  गुड़     17  किलो 
  8. धाय के फूल  100  ग्राम 
  9. सोंठ    100  ग्राम 
  10. कालीमिर्च  100  ग्राम 
  11. पीपल    100  ग्राम 
  12. लोह चूरन   100  ग्राम 
  13. लाल रोहितक की छाल   100  ग्राम 
  14. तेजपात    100  ग्राम 
  15. दाल चीनी     100  ग्राम 
  16. बड़ी इलाची    100  ग्राम 
  17. शरपुंखामूल     100  ग्राम 
  18. एलुआ     100  ग्राम 
  19. हर्र    100  ग्राम 
  20. बहेड़ा     100  ग्राम 
  21. बबूल की छाल      100  ग्राम 


 कालमेघासव कैसे बनाते हैं kalmeghasav kaise bnaye 

इन सभी औषधिओं को आसव निर्माण विधि से मिलकर एक महीने संधान करें और उसके बाद निथार कर शीशी में भरकर रखें .


लिवर और तिल्ली रोग में लाभकारी 

कालमेघासव का प्रयोग लिवर और स्प्लीन के कई रोगों को ठीक करने मे किया जाता है ,हेपेटोमेगाली  और स्प्लेनोमेगाली  दो  ऐसे ही रोग ज हैं जिनमे   यकृत और तिल्ली का आकार  बढ़ना शुरू हो जाता है , इन  रोग को ठीक करने में कालमेघासव अचूक असर दिखाती  है .इसमें मौजद  गिलोय और सप्तपर्ण बुखार को ठीक करते हैं  और पिप्पली और कुटज लिवर और स्प्लीन में प्रभावकारी है , इसका प्रमाण  आयुर्वेद में मिलता है. इस लिए आप समझ सकते हैं की कालमेघासव अकेले ही बुखार, लिवर और स्प्लीन के पुराने से पुराने  रोगों को नष्ट कर सकता है.


 पेट की समस्या को दूर करे 

कालमेघासव जठरागिनी   को सुदृढ़ बनाकर पाचनतंत्र को शक्तिशाली बना देता है .पाचन तंत्र को ठीक करने के लिए सबसे जरुरी है सुबह पेट का खाली हो जाना , कालमेघासव के प्रयोग से कबज का नाश होता है , और पाचन क्रिया में सुधार होता है .जो भी भोजन खाया जाता है,वो अतिशीघ्र पच जाता है  उससे नए रकत का निर्माण होता है और शरीर हष्ट पुष्ट हो जाता है .आसान भाषा में समझे तो कालमेघासव पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है .


शरीर के  शुद्धिकरण में लाभकारी 

कालमेघासव  शरीर में उपस्थित  विषैले जीवाणुओं और परजीविओं  से निपटने के लिए  बहुत प्रभावकारी औषधि है .इसके सेवन से शरीर से विषैले रोगकारक जीवाणु नष्ट होकर शरीर से बाहर निकल जाते है . जिससे शरीर शुद्ध हो जाता है . इससे धातुओं के शोधन का उत्तम कार्य होता है . परिणामस्वरूप ज्वर और बुखारा का संक्रमण  चक्र  के दोबारा   होने की सम्भावना नहीं रहती .


चेहरे के कील मुहासे में 

कालमेघासव में उपस्थित कुछ अन्य घटक इसको सामन्य त्वचा रोगों से  निपटने में भी कारगर बनाते हैं.जैसे की कील मुहासे सोरायसिस , और त्वचाशोध अदि रोगों में इसका प्रयोग किया जा सकता है .

कालमेघासव के फायदे  kalmeghasav ke fayede hindi me 

1) . इसके सेवन से शरीर में नए रक्त और बल की वृद्धि होती है .

2) . कालमेघासव के सेवन से लिवर और प्लीहा spleen कार्य क्षमत स्वस्थ हो  जाती है  

3) . बच्चों और बड़े लोगो के यकृत को स्वस्थ करता है पिलिआ आदि लक्षणों को ख़तम करता है . 

 4) . लिवर और तिल्ली बढ़ जाए तो  कालमेघासव के सेवन से फायदा होता है .

 5) . खून की कमी हो  शरीर का रंग पीला दिखे तब इसका सेवन करना चाहिए .

6) .  कालमेघासव के सेवन से सभी प्रकार के बुखार ठीक हो जाते हैं .

7) . इसके सेवन से शरीर के रस धातु शुद्ध हो जाते हैं .

8) . कालमेघासव -  रस धातु  और रक्त में मोजूद ज्वर के विषाणुओ को नष्ट  करता है .

9) . कालमेघासव के सेवन से जठरागिनी  सुदृढ़  हो जाती है .

10) . ज्वर के साथ अतिसार भी शुरू हो  जाए तो कालमेघासव का सेवन जरूर करना चाहिए .

11) . मलेरिआ और टाइफाइड अगर किसी दवा से ठीक न हो तो इसके सेवन से चमत्कारी लाभ मिलता है .

12).  मलेरिआ बुखार पीलिया और शरीरिक शुद्धिकरण  में लाभकारी .

13).  इसके सेवन से कबज भी ठीक हो जाती है .


कालमेघासव सेवन विधि  kalmeghasav sevan vidhi hindi me 

10 ml  कालमेघासव को 15 ml  पानी  में  मिलाकर  सुबह और शाम भोजन  के बाद  डॉक्टर के परामर्श के बाद पीना चाहिए .

final words:-

कालमेघासव के सेवन हर प्रकार के बुखार का समूल नाश तो होता है इसके साथ साथ ये शरीर के रसरक्तादि धातुओं को पुष्ट करके दोबारा बुखार आने की सम्भावना को ख़तम कर देता है .

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