-->

Thursday, March 11, 2021

author photo

 चंदनासव के फायदे नुकसान और सेवन विधि ,chandnasav sevan vidhi hindi ,चंदनासव के सेवन से पेशाव में जलन स्वपनदोष ,शवेतप्रदर प्रमेह हृदय रोग और धातु रोग में अच्छा लाभ मिलता है .चंदनासव में चन्दन प्रधान होने से ये मूत्र विकार शुक्राशय विकार दूर होते हैं .पुरुषों  के स्वपन दोष , पेशाव के साथ वीर्य आना , शुक्र प्रमेह आदि रोग दूर हो जाते हैं .

chandnasav in hindi benefits


चंदनासव घटक  द्रव्य chandnasav ingredients in hindi  

  1. सफ़ेद चन्दन  50 ग्राम 
  2. खस   50 ग्राम 
  3. नागरमोथा  50 ग्राम 
  4. गंभारी फल  50 ग्राम 
  5. नीलोफर  50 ग्राम 
  6. प्रियंगु   50 ग्राम 
  7. पद्माख  50 ग्राम 
  8. मंजीठ  50 ग्राम 
  9. लाल चंदन  50 ग्राम 
  10. पाठा  50 ग्राम 
  11. चिरायता   50 ग्राम 
  12. बढ़ की छाल   50 ग्राम 
  13. पीपल की छाल   50 ग्राम 
  14. कचनार की छाल  50 ग्राम 
  15. आम की छाल   50 ग्राम 
  16. कचूर  50 ग्राम 
  17. पित्तपापड़ा   50 ग्राम 
  18. मुलेठी   50 ग्राम 
  19. रसना  50 ग्राम 
  20. परवल के पत्ते  50 ग्राम 
  21. मोचरस  50 ग्राम 
  22. मुन्नका   950  ग्राम 
  23. धाय के फूल  800  ग्राम 
  24. चीनी 450  ग्राम 


चंदनासव के फायदे chandnasav ke fayede( benefits) in hindi 

  1. रक्तपित्त ,त्वचा की जलन 
  2. एसिडिटी मे
  3. शीतपित्त 
  4. रुक रुक कर पेशाब उत्तरना 
  5. पेशाब में जलन 
  6. श्वेत प्रदर ,रक्त प्रदर ,सुजाक
  7. प्यास अधिक लगने की परेशानी 

शरीर से गर्मी बाहर करे :-

चंदनासव शीतवीर्य  है इसलिए इसके सेवन से स्त्री और  पुरुषों वृद्धों  को पीला ,लाल  पेशाव आना ,पेशाव की गर्मी . पेशाव की  जलन , गर्मिओ के दिनों में पूरे शरीर की जलन को शांत करता है . इसके सेवन से मसाने की गर्मी शांत  होती है, और वीर्य की गर्मी को भी शांत करता है  इसीसे बल और वीर्य की वृद्धि होती है .

Spermatorrhea in hindi धातु रोग में लाभकारी :-

धातु रोग को पुरुषों का शत्रु कहते हैं ,क्यों की इस रोग के कारण पुरुषों का शरीर धीरे धीरे अंदर से खोखला होने लगता है ,वीर्य में शुक्राणुओं  की कमी होने लगती है, बिना उत्तेजना के वीर्य निकल जाता है .इस अवस्था में चंदनासव का सेवन गर्मिओ के दिनों में करने से बहुत फायदा होता है . 

beneficial in Gonorrhea सुजाक रोग में लाभ

कारी सुजाक रोग का मुख्य कारण गुदा मैथुन है , ये रोग अप्रकृतिक योन संबंधों के कारण फैलता है और स्त्री पुरुषों दोनों को संक्रमित कर सकता है .इसका अधिक प्रभाव मलाशय , मूत्राशय और गले पर पड़ता है .महिलाओं के गर्भाशय ग्रीबा (cervix )अर्थात  गर्भाशय के निचले  अंदरूनी श्लेष्म त्वचा को संक्रमित करता है .इस रोग में बहुत अधिक बार मूत्र आने लगता है , मूत्र के साथ जलन और पीव भी आने लगती है .इस रोग में चंदनसव का सेवन कुछ दिनों तक लगातार करना चाहिए .

सुजाक रोग की आयुर्वेदिक औषधि 

  • चंदनासव  20  ml   
  • देवदावरारिष्ट   20  ml   
  • सरिवाद्यारिष्ट  20  ml   
  • चन्दन तेल   20 drops 

इस सभी को मिलाकर तीन मात्रा बनाये और बराबर पानी मिलाकर तीन चार महीनो तक सेवन करने से पेशाव से पीब आना बंद हो जाता है .सुजा रोग में आराम मिलता है .

रक्त विकार और त्वचा विकार में लाभकारी 

सुजाक के कारण रक्त में भी विकार होने लगता है ,त्वचा रुक्ष हो जाती है ,चंदनासव में विषाणु  नाशक गुण होने से रक्तविकार और त्वचा विकार में अच्छा लाभ मिलता है .शरीर के चकतेशांत  हो जाते हैं .

रुक रुक कर पेशाव आना 

अधिक गर्म तासीर के पदार्थ खा लेने से यां गर्मिओ  के प्रभाव के कारण पेशाव में जलन होती है और कभी कभी खून भी आने लगता है , जिससे पेशाव खुलकर नहीं अत और मूत्र रुक रुक कर आने लगता है .इस रोग में चांदनासव  के सेवन से बहुत शीघ्र आराम  मिलता है .

चंदनासव 

चंदनासव  एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका प्रयोग  ह्रदिय , रक्तविकार , त्वचाविकार , मूत्राशय की गर्मी , पेशाव  की जलन ,शरीर का दाह प्यास अधिक लगना , सुजाक ,धातु रोग , स्वपनदोष , पेशाव में वीर्य निकलना , स्वपन में वीर्य नकल जाना , अदि रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है .

This post have 0 komentar


EmoticonEmoticon

Next article Next Post
Previous article Previous Post