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चव्यकारिष्ट फायदे उपयोग विधि घटक द्रव्य chavykarisht benefites in hindi

 चव्यकारिष्ट फायदे उपयोग विधि घातक द्रव्य   chavykarisht benefites in hindi एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका  प्रयोग पेट के विकारों को ठीक करने के लिए किया जाता है , जैसे की अफारा अग्निमांध , अंत्रवृद्धि , अंडवृद्धि , गुल्म रोग यकृत विकार अदि में उपयोगी है .

chavyakarisht ke fayede

chavyakarisht ingredients in Hindi चव्यकारिष्ट घटक  द्रव्य 

  1. चव्य 1 .870  ग्राम 
  2. चित्रकमूल  934  ग्राम
  3. काला जीरा  467  ग्राम 
  4. पोहकरमूल 467  ग्राम 
  5. वच   467  ग्राम 
  6. हाऊबेर  467  ग्राम 
  7. कचूर  467  ग्राम 
  8. पटल पत्र   467  ग्राम 
  9. हरड़   467  ग्राम 
  10. बहेड़ा   467  ग्राम 
  11. आमला 467  ग्राम 
  12. अजवाइन   467  ग्राम 
  13. कूड़े की छाल   467  ग्राम 
  14. इन्द्रायण-मूल   467  ग्राम 
  15. धनिया   467  ग्राम 
  16. रासना   467  ग्राम 
  17. दन्ती मूल   467  ग्राम 
  18. वायवडिंग  250  ग्राम 
  19. नागरमोथा  250  ग्राम 
  20. मंजीठ  250  ग्राम 
  21. देवदारु  250  ग्राम 
  22. सोंठ   250  ग्राम 
  23. कालीमिर्च   250  ग्राम 
  24. पीपल  250  ग्राम 
  25. गुड़ 13 .995  किलो 
  26. धाय के फूल  933  ग्राम 


मात्रा व सेवन विधि 

10 से 20 ml   दिन में दो बार, भोजन के बाद बराबर पानी के साथ दिन में दो बार सभा और शाम कम से कम तीन महीने तक सेवन करना चाहिए 


 chavykarisht benefites in hindi 

चव्यकारिष्ट के प्रयोग से अण्डवृद्धि अंत्रवृद्धि गुल्म आदि रोग नष्ट हो जाते हैं ,लिवर के विकारों को ठीक करता है  , कामला ,अफारा  पेट फूलना अग्निमांध खांसी जुकाम क्षय आदि रोगो में भी लाभकारी सिद्ध होता है .


पेट का अफारा :-

अग्निमांध के कारण खाया हुआ भोजन पेट में अधपचा रह जाता है ,भोजन सही से न पचने के कारण उसमे से वायु उत्पन होती है जो पेट में भर जाती है इसे अफारा कहते हैं .चवयकारिष्ट के लगातार प्रयोग से जैंथरागिनी प्रदीप्त होती है और बदहजमी ख़तम  होकर पेट की वायु ख़तम हो जाती है .


सर्दी खांसी जुकाम में लाभकारी 

फेफड़ो की सूजन , जुकाम और खांसी के रोगी को इसका सेवन करने से स्वस्थ में सुधर होता है .इसका सेवन दमा के रोगी को भी स्वास लेने में आसानी हो जाती है और टीवी के रोगी को इसका सेवन करने से रोग शीघ्रता से ठीक होने लगता है .

उलटी दस्त में लाभकारी :-

इस अरिष्ट का सेवन करने से उल्टियां ठीक हो जाती हैं और दस्त का वेग सामान्य हो जाता है .


बवासीर में उपयोगी 

इस अरिष्ट का सेवन करने से बवासीर के रोग में सूधार देखने को मिलता है , खुनी और बादी बवासीर में इस अरिष्ट का सेवन करने से मस्से  सूखने लगते है दर्द कम हो जाती है और कब्ज ख़तम होने लगती है , जिससे बवासीर के रोगी को बहुत आराम मिलता है .


नशा छुड़ाने के लिए उपयोगी 

बीड़ी सिगरेट और गुटखा का नशा छुड़ाने के लिए इस अरिष्ट का सेवन ६ महीने से लेकर एक साल तक लगातार  करवाना चाहिए .

final words

 इसके सेवन से बवासीर ,अफारा ,गुल्म, प्रमेह,नजला  जुकाम, क्षय ,खांसी,नशा की आदत , ‌‌‌अष्ठीला, वातरक्त,अंडवृद्धि , उदर विकार तथा आन्त्र-वृद्धि, कामला, लिवर  विकार, और अग्निमांद्य में ‌‌‌बहुत जल्दी  लाभ मिलता है।


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