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शिव शंकर भजन लिरिक्स shiv mahadev bhajan lyrics -

Shiv Ji Bhajan Lyrics in Hindi 
शिव शंकर भजन लिरिक्स हिंदी में भगण शिव के भजन लिखे हुए दिखाओ

 


कभी शिवजी के मंदिर गया ही नहीं

कभी शिवजी के मंदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।

कभी शिवजी के मंदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।


शिव का ध्यान कभी भी, लगाया नहीं,

सिर्फ दीपक जलाने से, क्या फायदा।।


लाख माथे पे अपने, तू चंदन लगा,

बिन पूजा के, कुमकुम का टिका लगा।।

लाख माथे पे अपने, तू चंदन लगा,

बिन पूजा के, कुमकुम का टिका लगा।।


गुणगान कभी इनका, गाया नहीं,

उपदेश सुनाने से, क्या फायदा।।

कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।


रोज पानी से तन को, तो धोया मगर,

मन के मेल को अब तक, मिटाया नहीं।।

रोज पानी से तन को, तो धोया मगर,

मन के मेल को अब तक, मिटाया नहीं।।


सच्चा प्रेम ह्रदय में, बसाया नहीं,

रेवा जल में नहाने से, क्या फायदा।।

कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।


दुसरो को तो, धर्म की बातें कहे,

धर्म की राह पर तू, स्वयं ना चले।।

दुसरो को तो, धर्म की बातें कहे,

धर्म की राह पर तू, स्वयं ना चले।।


सच्चे धर्म का जिसको, ज्ञान नहीं,

ऐसा ज्ञानी कहलाने से, क्या फायदा।।

कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।


शाम ढलते ही घर में, उजाला करे,

मन में भक्ति का दीपक, जलाया नहीं।।

शाम ढलते ही घर में, उजाला करे,

मन में भक्ति का दीपक, जलाया नहीं।।


शिव शंकर की आरती, उतारी नहीं,

सिर्फ डमरू बजाने से, क्या फायदा।।

कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।


शिव के चरणों को, छोड़ के जाना कहाँ,

शिव धाम बिना है, ठिकाना कहाँ।।

शिव के चरणों को, छोड़ के जाना कहाँ,

शिव धाम बिना है, ठिकाना कहाँ।।


शिव के चरणों में, बन्दे रम जा जरा,

व्यर्थ जीवन बिताने से, क्या फायदा।।

कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।


शिव शंकर ही तेरा, उद्धार करे,

तेरे जीवन की नैया, को पार करे।।

शिव शंकर ही तेरा, उद्धार करे,

तेरे जीवन की नैया, को पार करे।।


शिव का नाम तो सारा, जमाना कहे,

फिर व्यर्थ भटकने से, क्या फायदा।।

कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।


कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।

कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।


कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।

कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।


कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।

कभी शिव जी के मँदिर, गया ही नहीं,

शिव भक्त कहाने से, क्या फायदा।।



शीश गंग अर्धंग पार्वती - शिव शंकरभजन लिरिक्स 


शीश गंग अर्धंग पार्वती,

सदा विराजत कैलासी ।

नंदी भृंगी नृत्य करत हैं,

धरत ध्यान सुर सुखरासी ॥


शीतल मन्द सुगन्ध पवन,

बह बैठे हैं शिव अविनाशी ।

करत गान-गन्धर्व सप्त स्वर,

राग रागिनी मधुरासी ॥


यक्ष-रक्ष-भैरव जहँ डोलत,

बोलत हैं वनके वासी ।

कोयल शब्द सुनावत सुन्दर,

भ्रमर करत हैं गुंजा-सी ॥


कल्पद्रुम अरु पारिजात तरु,

लाग रहे हैं लक्षासी ।

कामधेनु कोटिन जहँ डोलत,

करत दुग्ध की वर्षा-सी ॥


सूर्यकान्त सम पर्वत शोभित,

चन्द्रकान्त सम हिमराशी ।

नित्य छहों ऋतु रहत सुशोभित,

सेवत सदा प्रकृति दासी ॥


ऋषि मुनि देव दनुज नित सेवत,

गान करत श्रुति गुणराशी ।

ब्रह्मा, विष्णु निहारत निसिदिन,

कछु शिव हमकूँ फरमासी ॥


ऋद्धि-सिद्धि के दाता शंकर,

नित सत् चित् आनन्दराशी ।

जिनके सुमिरत ही कट जाती,

कठिन काल यमकी फांसी ॥


त्रिशूलधरजी का नाम निरन्तर,

प्रेम सहित जो नर गासी ।

दूर होय विपदा उस नर की,

जन्म-जन्म शिवपद पासी ॥


कैलासी काशी के वासी,

विनाशी मेरी सुध लीजो ।

सेवक जान सदा चरनन को,

अपनो जान कृपा कीजो ॥


तुम तो प्रभुजी सदा दयामय,

अवगुण मेरे सब ढकियो ।

सब अपराध क्षमाकर शंकर,

कnकर की विनती सुनियो ॥



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