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आशुतोष महाराज जी की आरती लिखी हुई ashutosh maharaj arti lyrics


मेरे सत गुर तेरे पथ पर हम सदा चलते रहें 

प्रेम आपस में करें और सबके संग मिल के रहें |

मेरे सत गुर तेरे पथ पर हम सदा चलते रहें 

प्रेम आपस में करें और सबके संग मिल के रहें ||


धरम के पथ पर चले तो स्वर्ग बन जाये ये धरा 

कष्ट फिर क्या प्रेम से गर मन हमारा हो भला |

मेरे सत गुर तेरे पथ पर हम सदा चलते रहें 

प्रेम आपस में करें और सबके संग मिल के रहें ||


भूल से भी  कोई भूल हो जाये तो हम स्वीकार लें 

सुख दुःख के पल में हम आपका ही नाम सो सो बार लें |

मेरे सत गुर तेरे पथ पर हम सदा चलते रहें 

प्रेम आपस में करें और सबके संग मिल के रहें ||


आचरण सूंदर रहे कर्तव्य से विचलित न हो 

हम स्वयं अपने ही कर्मो से कभी शापित  न  हों |

मेरे सत गुर तेरे पथ पर हम सदा चलते रहें 

प्रेम आपस में करें और सबके संग मिल के रहें ||


ज्ञान बैभब सम्पदा सम्मना यश कुछ भी मिले 

धरम के व्यवहार की ये नीव फिर भी न हिले |

मेरे सत गुर तेरे पथ पर हम सदा चलते रहें 

प्रेम आपस में करें और सबके संग मिल के रहें ||


प्रेम आपस में करें और सबके संग मिल के रहें |||

प्रेम आपस में करें और सबके संग मिल के रहें ||||

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आशुतोष महाराज जी की आरती लिखी हुई

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी


सारे जग के अघ हरते हो दीं दुखी के सम्बलकारी 

सारे जग के अघ हरते हो दीं दुखी के सम्बलकारी 

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी


तुम प्रतिपालक अन्तर्यामी नाथ प्रभु दुःख भंजन हारी

तुम प्रतिपालक अन्तर्यामी नाथ प्रभु दुःख भंजन हारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी


हर  युग  में आए हो बनकर  राम रहीम कभी बनबारी

हर  युग  में आए हो बनकर  राम रहीम कभी बनबारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी


तन मन सब अर्पित तुमको और भला क्या भेंट हमारी 

तन मन सब अर्पित तुमको और भला क्या भेंट हमारी 

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी


शरणागत हम सब है तिहारी तुम डाटा हो हम हैं भिखारी 

शरणागत हम सब है तिहारी तुम डाटा हो हम हैं भिखारी 

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी


हे अविनाशी  बिघन विनाशी टूटे न अब प्रीत हमारी

          हे अविनाशी  बिघन विनाशी टूटे न अब प्रीत हमारी        

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी


दो ऐसा वरदान गुरुवर बन जाएँ तेरे ही पुजारी 

दो ऐसा वरदान गुरुवर बन जाएँ तेरे ही पुजारी 

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी


आस एक विश्वास तुम्ही हो दीं दयाल हे त्रिपुरारी 

आस एक विश्वास तुम्ही हो दीं दयाल हे त्रिपुरारी 

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी

आरती हम करते हैं तुम्हारी आशु पिता हे मंगलकारी

आशु पिता हे मंगलकारी

आशु पिता हे मंगलकारी

आशु पिता हे मंगलकारी

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श्लोक 

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।


अर्थ 

आप कपूर की तरह शुद्ध सफेद हैं,

आप करुणा के अवतार,

तुम हो। सांसारिक अस्तित्व का सार,

तुम्हारी माला नागों का राजा है

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त्वमेव माता च पिता त्वमेव

त्वमेव बंधू च सखा त्वमेव

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव

त्वमेव सर्वं मम देव देव

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शांति पाठ 

 ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षॅं शान्ति:,

पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।

वनस्पतय: शान्तिर्विश्र्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,

सर्वॅंशान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि।।

ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:।।


अर्थ 

शान्ति: कीजिये, भगवन त्रिभुवन में,त्रिलोक में, जल में, थल में और गगन में,

अन्तरिक्ष में, अग्नि पवन में, औषधि, वनस्पति, वन, उपवन में,

सकल विश्व में अवचेतन में !

 

शान्ति राष्ट्र-निर्माण सृजन, नगर, ग्राम और भवन में

जीवमात्र के तन, मन और जगत के  कण कण में,

ॐ शान्ति: ! शान्ति: ! शान्ति:॥



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