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सच्ची डरावनी कहानी हिंदी में Purane kile ki Darawni kahani

 एक बार की बात है किसी जंगल में बहुत पुराना किला था. कुछ दोस्त उस किले के समीप ..सभी दोस्त सोचते है की रात में उस किले में कौन ठहर सकता है जो रात को रुकेगा वही सबसे बहादुर होगा और सभी ने रात को प्लान किया हम सब उस पुराने किले में जाएंगे और अलग अलग उस किले में ठहरेंगे जो भी सुबह तक उसमे रुका रहेगा वो जीतेगा

पुराने किले की डरावनी  कहानी hindi story

जैसा की तय था सभी लोग उस किले के बहार खड़े थे और रात होने का इंतज़ार कर रहे थे जैसे ही रात हुई सब लोग अंदर गए और अपने हिसाब से कमरों में रुक गए और उन्हें रात भर यही पर रुकना था और सुबह होते ही सबको बहार मिलना था

डरावनी  कहानियाँ हिंदी में  

जो डर के घर चला जाएगा वो हरा हुआ मन जाएगा एक घंटा ही बीता था की उनमे से दो दोस्त के पास रात में कुछ अजीब सी चीज आयी और वो डरके वहा से भाग गए और अब दो ही बचे थे जब उन दो ने उनकी आवाज सुनी तो वो भी डरने लगे.पर जब अंदर आ ही गए तो रुक जाते है 


दोनों के मन में एक ही सवाल था की वो दोनों किस्से डर कर भागे थे वो दोनों अलग-अलग कमरे में थे अचानक ही उस किले में ठण्ड बढ़ने लगी थी जबकि मौसम की बात करे तो गर्मी के दिनों में ठण्ड आना कोई आम बात नहीं थी  .उनमे से एक दोस्त के पैर से कुछ टकरा गया 


और वो भी वहा से डरके भगा और जोर से चिल्लाता हुआ बाहर आ गया अब अंदर सिर्फ एक ही बचा था अब वो भी सोच रहा था की कुछ तो है जो उन्हें डरा रहा है पर अब एक ही काम था या तो यह रुका जाए या यहां से भगा जाए.अब चुकी वो अकेला ही बचा था और सुबह तक अगर वो रुक जाता है 


तो वो विजेता कहलायेगा वो सब यही सोच कर अंदर ही रहना ठीक समझा, तभी आधी रात बीती ही थी की कुछ लोगो की आवाजे आने लगी आवाजों से ऐसा लग रहा था की वो लोग लड़ रहे है पर यह बात समझ नहीं आ रही थी की वो किस बात पर लड़ रहे है सोचा की कही ये चोर तो नहीं है जो अंदर आकर छुप गए है और अपने हिस्से के लिए लड़ रहे है और कही उन्होंने मुझे यहां देख लिया तो मुझे नुक्सान पहुंचा सकते है     


चुप-चाप बस बैठा वही सोच रहा था की ये कौन है तभी उस किले में अचानक बहुत रौशनी हो गयी पर ये रौशनी नीचे ही थी क्योकि ऊपर के कमरों में तो अँधेरा ही है जब बाहर निकल कर देखा तो उस हाल में कोई नहीं था पर ये रौशनी कहा से आ रही थी कुछ समझ नहीं आ रहा था वो लोग भी अब दिखाई नहीं दे रहे


जो लड़ रहे थे पर ये रौशनी सिर्फ एक मोमबत्ती से आ रही थी पर ये मोमबत्ती कहा से आयी ये पता नहीं और वो लोग भी कही नहीं थे अब डर तो लग रहा था क्योकि कोई नहीं दिख रहा था कुछ देर बाद फिर आवाजे आने लगी और झगड़ा बढ़ गया पर कोई दिख क्यों नहीं रहा.  धीरे-धीरे सुबह हो गयी और 

पुराने किले की डरावनी स्टोरी हिंदी में 

अब कोई रौशनी नहीं थी और वहा कोई नहीं था अब बाहर आने का समय हो गया था सभी दोस्त अब अपने घर पर थे और काफी डरे हुए थे जब उनके सामने वो गया तो वो कहने लगे की तुम बहुत बहादुर हो जो सुबह होने पर आये वो दोस्त बहादुर तो कहलाया पर वो लोग कौन थे 


और वो रौशनी बस यही बाते उसके दिमाग में चल रही थी जिसका जवाब उसे नहीं मिल रहा था इस बात को काफी साल बीत गए पर अब उस किले में जाने की अब किसी की भी हिम्मत नहीं हुई हमे लगता है की कुछ जरूर है जिसका हमे पता नहीं है और शायद कभी लगेगा भी नहीं.

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