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वो आदमी नहीं भूत था real ghost hindi story

  बात उन दिनों की है जब बहुत गर्मी पड़ रही थी, कुछ लोग गर्मी से बचने के लिए किसी पेड़ की छाव को तलाश कर रहे थे, गर्मी के दिनों में तो बस आदमी यही सोचता रहता है की थोड़ी सी छाव मिल जाए तो राहत भी मिले और इतनी तेज धूप में और छाव का कुछ हिस्सा मिलना तो बड़ा अच्छा अनुभव होता,

real ghost hindi story


मेरे कुछ दोस्त बस का इंतज़ार कर रहे थे, delhi से बस से जाना तय हुआ था अगले दिन उन सभी का एग्जाम जयपुर में था, सभी लोग ने बस से जाने का विचार किया और अगले दिन जैसा तय था एग्जाम देकर उन्हें वापिस भी आना था, बस का इंताजर ख़त्म हुआ और 


सभी लोग बस में चढ़ गए और बस ने फिर जयपुर की और रुख किया, रास्ता लंबा था सभी ने अपने मोबाइल फोन निकाल लिए और कुछ मधुर संगीत सुनते सुनते बस की हलकी हलकी हवा के झोको को सुनते हुए चले जा रहे थे.  


फिर बस एक ढाबे पर रुकी और सभी ने कुछ न कुछ खाया और चुकी थोड़ा समय था अभी तो सभी लोग वही पर टहलने लगे, चारो दोस्तों ने सोचा की थोड़ा आराम कर लिया जाए


अभी तो बस चलने में काफी समय है, आराम करने के चक्कर में उनकी आँखे लग गयी फिर क्या था बस उनकी छूट गयी थी जब उनकी आँखे खुली तो देखा की बस हमे लिए बगैर ही चली गयी और हम यह पर सोते ही रह गए, उन सभी का कुछ समान तो बस में ही रह पर उन सभी के पास पेसो का पर्स सभी के पास था,


समय काफी हो गया था और कोई भी साधन उनके पास जाने के लिए नहीं था ऊपर से ये गर्मी वैसे सर दर्द बनी थी. ऊपर से बस छूट गयी रोड पर चारो दोस्त बस का इंतज़ार कर रहे थे पर कुछ भी साधन रुकने को तयार ही नहीं था,


बहुत ही कोसिस के बाद एक कार उनके सामने रुकी और उसने चारो दोस्तों को लेफ्ट देदी, सभी दोस्त गाडी में बैठ गए, गाड़ी चलाने वाला एक आदमी था देखने में बड़ा अजीब लग रहा था, पूछने पर पता चला की वो भी जयपुर ही जा रहा था,  


उस आदमी ने कहा की तुम लोग सभी एग्जाम देने के लिए जा रहे हो और कल तुम्हारा एग्जाम है और कल ही तुम अपने घर वापिस जाने के लिए सोच रहे है, इस पर सभी दोस्तों ने सोचा की इसे कैसे पता चला की हम क्यों और कहा जा रहे है, अब सभी दोस्तों के अंदर कुछ भय बन रहा था की ये आदमी कौन है,


इस पर एक दोस्त ने पूछा की आप हमे जानते हो क्या, इस पर आदमी ने कहा की नहीं, में तो तुम्हे नहीं जनता बस ऐसे ही एक अंदाज़ा लगा लिया था, पर दोस्तों को उसकी बात पर कोई viswas नहीं था, 


दूसरे दोस्त की नज़र उस गाड़ी के मीटर पर गयी, जो की स्पीड तो 140 दिखा रहा था पर गाडी की स्पीड 60 से ज्यादा नहीं थी, इस पर उस दोस्त ने कहा की आपकी स्पीड मीटर खराब है वो सही स्पीड नहीं दिखा रही, आदमी ने कहा है वो खराब है,


लगभग शाम ही हो गयी थी और सभी लोग जयपुर पहुंच ही गए थे जब गाडी से उतरे तो तो एक दोस्त की नज़र उस आदमी के जूते पर गयी तो वो जूते उलटे थे पर उलटे जूते से गाड़ी को केसा चला सकता है कोई, और सभी दोस्त किसी होटल में रुकने की जगह ढूंढ  रहे थे और वो दोस्त यही कह रहा था 


की वो आदमी एक भूत  था पर किसी ने भी उसकी बात नहीं मानी, और अगले दिन जैसा की तय था सभी लोग एग्जाम देते ही वापिस घर आ गए और ये किस्सा उस दोस्त को कभी नहीं भुलता जिसने कहा था की वो आदमी एक भूत  था…

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