-->

सोने की मछली

कई साल पहले लिंगापुर नाम के एक गांव में सोमबैया नाम का एक मछुआरा मछलियाँ पकड़ता था और ज़िंदगी व्यतीत करता था। वो मछलिया पकड़ने गांव के बाहर एक नदी में जाल डालता था और सोमबैया रोज़ केवल दो ही मछलियाँ पकड़ता था। जब जाल में ज़्यादा मछलियाँ फस जाती तो वो दो को छोड़कर बाकि मछलियों को नदी में वापिस फेक देता। फिर उन मछलियों को बाज़ार में बेच कर जो पैसे मिलते उससे अपना घर चलाता। एक दिन उसकी बीवी ने उससे कहा :-


बीवी:- आप थोड़ी ज़्यादा मछलियाँ क्यों नहीं पकड़ के लाते? उन्हें बेच कर हम और ज़्यादा पैसे कमा सकते है। 


उसकी बीवी उससे झगड़ा करती थी। ऐसे ही उसने एक दिन नदी में जाल डाला पर उस दिन जाल में कोई मछली नहीं फसी। वो बेचारा मनमरा हो कर वापिस लोट आया। फिर एक जगह बैठ कर सोचने लगा की क्या किया जाये। इसी तरह कई दिन गुज़र गए उसे कोई मछली नहीं मिलती थी। एक दिन वो नदी किनारे पत्थर पर जा बैठा और दुखी मन से रोते हुए सोचने लगा :-


मछुआरा :- अरे मैंने क्या गलती की है कि मेरे जाल में एक भी मछली नहीं फस्ती है। मैं तो रोज़ बस दो ही मछली पकड़ता था। अब मेरी ज़िंदगी कैसे गुज़रेगी? 


वो सोच ही रहा था इतने में ही नदी में से एक बड़ी सी मछली ऊपर उठ आयी। उसने कहा 


मछली:- मैं इस नदी का राजा हूँ। जब तुम मछली पकड़ते हो, मैं तुम पर नज़र रखता हुँ। मैंने देखा है तुम लोभी नहीं हो। सिर्फ दो ही  पकड़ते हो। इससे मैं और मेरी मछली प्रजा बहुत खुश है। मुझे तुम्हारी परिस्तिथि पर दया आती है इसलिए आज से हर रोज़ मैं तुम्हे एक सोने की मछली (Goldfish) दे दिया करूंगा। तुम उसे बेच कर ज़िंदगी बिता लेना। मैं आशा करता हुँ कि इससे तुम्हारी ज़िंदगी सुधर जाएगी। 


ये कह कर वो मछली राजा पानी के अंदर चला गया। उस दिन मछुआरे ने जब जाल डाला तो जाल में एक सोने की मछली (Goldfish) फसी। उसे वो ले जा कर बाजार में बेच आया। उसे काफी पैसे मिले। इस तरह हर रोज़ सोने की मछली (Goldfish) मिलती रही और धीरे-धीरे वो काफी अमीर बनने लगा पर वो अपना कर्तव्य नहीं भूला। जिस नदी की वजह से वो इतना अमीर बना उस नदी में मछलियों की संख्या बढ़ाने के लिए हर रोज़ मछलियों का चारा वहाँ डालता। 



कहानी की सीख़ :- ईमानदारी का फल हमेशा मिलता है। 


Related Posts

There is no other posts in this category.

एक टिप्पणी भेजें