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इच्छाधरी नागिन की हिंदी कहानी Ek ichhadhari nagin ki kahani

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  एक समय की बात है. अंबिकापुर नगरी नरेश माहिम राठौर ने अपने राज्य में एक प्रतियोगिता का आयोजन किया. इस प्रतियोगिता में एलान किया गया कि देश-विदेश में उगने वाले तरह-तरह के स्वाद, आकार और शक्तियों से भरपूर फलों को राजा के सामने पेश करना। 


एलान के मुताबिक जो फल सबसे ज्यादा विचित्र और अद्भुत शक्तियों वाला होगा उस फल को लाने वाले को अंबिकापुर नरेश एक संगमरमर का बना हुआ महल इनाम में देंगे। राजा का ऐलान अंबिकापुर से कुछ दूर फूलपुर गांव में रहने वाले दो लकड़हारे ने भी सुना। इन दोनों का नाम था. रामू और कालू। 


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यह दोनों एक दूसरे के बड़े ही पक्के दोस्त थे. और हमेशा एक दूसरे के साथ ही रहने की कोशिश किया करते थे. 


रामू पढ़ाई और निखट्टू था. दूसरा कालू कुछ बुद्धिमान था. और खुद को हमेशा रामू से बहुत अच्छा समझा करता था. राजा का ऐलान सुनने के बाद इन दोनों ने सोचा। क्यों ना राजा का इनाम पाने के लिए मिलकर कोशिश की जाए? उन्हें याद आया. गांव में रहने वाले जादूगर ने एकबार बातचीत के दौरान उन्हें बताया था. कि गांव के पास रहने वाले जंगल में कई प्रकार के विचित्र फल फूल लगते हैं.


 जिनके बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता. जादूगर ने यह भी कहा था. कि जंगल के काफी अंदर जाने पर एक बरगद के पेड़ पर रहने वाली माता हर्षिका की पूजा करने के लिए परी लोक की परीया आती है. और पूजा करके प्रसाद के रूप में माता को परीलोक के जादुई फल चढाती है. और परीलोक चली जाती है.


रामू और कालू ने सोचा। कि वह गांव में आगे जाकर परीलोक के उन फलों को अगर प्राप्त कर लें तो फिर वैसे फल तो पूरे संसार में और कहीं नहीं मिल सकते। और इसलिए वह यह इनाम जरूर जीत लेंगे। 


मन में ऐसा विचार आते ही उन दोनों ने जंगल में जाकर फल ढूंढने का निर्णय कर लिया। कालू ने रामू से कहा - मित्र जादूगर के अनुसार यदि हम जंगल में गहरे जाकर बरगद के पेड़ की छानबीन करें, तो हमें वहां पर परी लोक से लाए गए फल मिल सकते हैं. परीलोक के जादुई फल होने के कारण यह फल कभी खराब ही नहीं होते। और उन्हें तरह-तरह की शक्तियां होती हैं. 


तथा यह राजा के ऐलान के अनुसार ही विचित्र रंगों और आकारों के भी होते हैं. क्यों ना हम अपनी किस्मत आजमाए और फलो को ढूंढने के लिए जंगल में चले. कालू की बात सुनकर रामू ने कहा - कालू सही कह रहे हो मैं भी बहुत दिनों से यही सोच रहा हूं कि क्यों ना हम अपनी किस्मत आजमाएं। शायद यह हमारे ही गांव के जंगल में अपने फल इसलिए रख कर जाती हैं कि राजा का ऐसा ऐलान होने वाला हो. और हमारी किस्मत से वह संगमरमर का बड़ा महल जीतना पहले से ही लिखा हो.


दोनों दोस्त इस तरह की बात करके जंगल की तरफ निकल पड़े। वे अभी पहुंचे हैं थे कि जंगल में तरह-तरह के जानवरों से उनका सामना शुरू हो गया. सबसे पहले उनके ऊपर एक जंगली सूअर ने हमला कर दिया। किंतु दोनों दोस्तों ने बड़ी ही बहादुरी से उस जंगली सूअर से अपने प्राणों की रक्षा की. किंतु जंगली सूअर से पीछा छुड़ाने के चक्कर में वह जंगल में बहुत आगे पहुंच गए. और भागते - भागते उन्हें यह ख्याल भी नहीं रहा कि पूरी तरह से शाम हो गई थी. 


आगे का रास्ता दिखाई ना देने के कारण वे वहीं रुक गए. किंतु जानवरों के डर से उन्होंने सोचा कि वह किसी बड़े पेड़ पर सो जाएंगे। उन्हें अँधेरे में एक बड़ा पेड़ दिखाई पड़ा। और दोनों दोस्त उस पेड़ पर चढ़कर उसकी चौड़ी डाली पर अपनी पगड़ी से खुद को बांधकर सो गए. कुछ ही देर बाद दोनों को तरह-तरह की आवाजें सुनाई देने लगी. और रोशनी दिखाई देने लगी. तभी उन्होंने देखा कि आसमान से परिया नीचे उतर रही हैं.


 और जिस पेड़ पर भी सोए हुए थे. उसी पेड़ की सबसे ऊंची डाली पर बनी एक गोसले में कुछ फलों को रखकर, और कुछ पूजा पाठ करके मैं वहां से चली गई. दोनों दोस्तों को समझ में आ गया कि मैं उसी बरगद के पेड़ पर आसरा लिए बैठे हैं जिसे वे ढूंढ रहे थे.


वे बड़े खुश हुए. और परियों के जाते ही वे पेड़ की सबसे ऊंची डाली पर चढ़े। उन्होंने देखा घोसले में सतरंगी रंग के कुछ फल रखे हुए हैं. जिनमें से अद्भुत रोशनी निकल रही है. और जिनका आकार हर पल बदलता जा रहा है. उन फलों को देखकर उन्हें पूरा विश्वास हो गया कि राजा द्वारा शुरू की गई प्रतियोगिता को वही जीतने वाले हैं. लेकिन वे जैसी ही फल को उठाने की कोसिस करते तुरंत ही वह पर एक नागिन प्रकट हो गई. और उसने दो पलों में ही एक फल को निगल लिया। 


यह देखते ही रामू ने तुरंत बाकी बचे आखरी फल को अपने मुंह में डाल लिया। रामू के ऐसा करते ही नागिन वहां से गायब हो गयी. लेकिन फल रामू के मुंह में जा चुका था. कालू बड़ा दुखी हो गया. और उसने सोचा रामु ने तो यह अद्भुत फल खा लिया है. अब राजा को क्यों दिखाएंगे? 


रामु बोलै कालू तुम उदास ना हो मैंने उसको खाया नहीं सिर्फ निकला है. तुम मुझे तालाब की तरफ ले चलो और उल्टा लटकाकर मेरे गले पर वार करो. मेरा फल जरूर मेरे गले से बाहर आकर तालाब में गिर जाएगा।


और फिर हम उसे निकाल लेंगे। रामु की बात सुनकर कालू को चैन आया. और उसने तुरंत ही रामू को पास में ही बने एक तालाब में अपने कंधे की मदद से उल्टा लटका दिया। और उसको जोर - जोर से मारने लगा. ऐसा करने से सचमुच ही उसके मुंह से निकल कर तालाब में गिर गया. किन्तु उसी समय एक सफेद रंग की नागिन प्रकट हुई. और उसने फल अपने मुंह में डाल लिया। और वहां से गायब हो गई. इस तरह से दिए गए दो जादुई फल दोनों खतरनाक नागिन और द्वारा लिए गए. 



और यह दोनों उदास होकर वापस अपने गांव आ गए. इन दोनों के जाने के बाद दोनों सांप जिसमें से एक सफेद और दूसरे का रंग हरा था. अपने असली रूप इच्छाधारी नागिन में बदल गए. और उन्होंने अपने आप को सुंदर लड़कियों के रूप में बदल लिया। और दोनों को रामु बड़ा ही पसंद आया. और उन्होंने सोचा कि कालु बड़ा ही दुष्ट व्यक्ति है. और उसने रामू को मारा है और रामू की वजह से वह दोनों फल उनको को मिला है. वे दोनों ही रामू से प्यार करने लगी. और वे रामु  और कालू का पीछा करते-करते उनके गांव पहुंच गई. और रामू के घर के पास ही घर बनाकर रहने लगी. वे दोनों लड़कियों के रूप में रामू का बड़ा ध्यान रखती। रामू के घर में अब किसी बात की कमी नहीं थी. रामू के घर में आने वाली कोई भी मुसीबत को दोनों नागिनी आने से पहले ही खत्म कर देती थी.



धीरे-धीरे रामू को भी इस बात का एहसास होने लगा. और एक दिन उसने उन सांपों के घर जाकर उन्हें बाहर बुलाया। और कहा तुम दोनों कौन हो और लड़कियां होने के बावजूद भी अकेले यहां कैसे रहती हो? तुम्हारे मां बाप कहां है? उन दोनों इच्छाधारी सांपों ने लड़कियों के रूप में रामू से कहा रामु हम पास के जंगल में रहने वाले गरीब लड़कियां हैं. हमारे माता-पिता को सांप ने खा लिया। इसलिए हम लोग यहां घर बनाकर रहती हैं. और तुम्हें कड़ी मेहनत करते देख हमें तुम पर दया आई. इसलिए हम तुम्हारा ध्यान रखते हैं. हम तुमसे एक बात कहना चाहते हैं. बात यह है कि हम अकेले इधर आते हैं. और तुम भी अकेले ही हो. क्या ऐसा नहीं हो सकता कि तुम्हारा विवाह हमारे साथ हो जाए? रामू ने कहा - बात तो ठीक है ऐसा हो सकता है. पर तुम में से कौन से कोण मुझसे विवाह करना चाहता है?



यह सुनकर दोनों इच्छाधारी नागिन बोली - रामु हम दोनों ही तुमसे प्यार करना करते हैं. और दोनों ही तुमसे विवाह करना चाहते है. उनकी बात सुनकर रामु हैरान हो गया. और सोचने लगा भला में तो एक हु और मुझसे ये दोनों कैसे विवाह कर सकते है? किन्तु उन दोनों के विवश करने पर रामु ने उन दोनों से ही निकाह कर लिया। इसके बाद रामू के जीवन में किसी प्रकार की कोई भी कमी नहीं रही. वह जब जो चाहता वैसा ही हो जाता। कड़ी धूप में बारिश हो जाती, तो कभी पतझड़ के मौसम में फूल खिल जाते, खाली घड़ा अपने आप भर जाता और मुंह से शब्द निकलते ही रामू की इच्छाएं पूरी हो जाती। पर रामु ने कभी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया। कि ऐसा जादू किस तरह से होता है. वह अपनी पत्नियों के साथ जीवन का आनंद उठाने लगा. इस विवाह के समय रामू का दोस्त कालू पड़ोस के गांव में अपनी बहन की शादी में गया हुआ था. 



जब वह लौटकर आया. तो उसने देखा कि रामू दोनों पत्नियों के साथ अपना जीवन खुशी से बता रहा है. यह देखकर कालू को रामू से बड़ी ही जलन और हैरानी हुई. और यह जानने के लिए कि अचानक जिस निखट्टू और गरीब रामू से कोई भी लड़की विवाह करने को तैयार नहीं थी. अचानक दो लड़कियों ने कैसे विवाह कर लिया? वह जादूगर विचित्र सेन के पास गया. जादूगर ने अपने जादुई शीशे में देखा और बताया रामू का विवाह लड़कियों से नहीं बल्कि दो इच्छाधारी नागिनओं से हुआ है. और यह नागिनी वहां उसी जंगल में उसी समय से रह रही थी जब वह विचित्र फल लेने गए थे तुम लोग. तथा रामू को इस बात का पता भी नहीं है कि उसकी पत्नियां इच्छाधारी नागिन है. कालू ने तुरंत रामू को जदुगर द्वारा बताई गई यह बात की उसकी दोनों पत्नियां इच्छाधारी नागिन है तुरंत बता दी. किंतु उसकी बात पर रामू को भरोसा नहीं हुआ. लेकिन फिर वह सोचने लगा कि कुछ ना कुछ तो बात जरूर है. और मुझे यह जरूर पता लगाना चाहिए। कि आखिर यह दोनों लड़कियां कौन है?


एक बार जादूगर विचित्र सिंह ने बातों ही बातों में कहा था. कि इच्छाधारी नगीने 24 घंटे में एक बार अपने असली रूप में जरूर आती है. इसलिए रामू ने यह सोचा कि अगर यह दोनों इच्छाधारी नगीने हैं. पूरे दिन में एक बार अपने असली रूप में जरूर आएंगे। उसने अपनी दोनों पत्नियों से कहा कि वह खेती के लिए बीज लेने शहर से बाहर जा रहा है. और 2 दिन बाद आएगा। और फिर अपने घर के अंदर ही पत्नियों पर नजर रखने के लिए छुप गया. इच्छाधारी नागिन को जैसे ही पता चला कि उनका पति रामू विदेश गया है. और 2 दिन तक वह घर में नहीं आएगा। वे तुरंत अपने असली रूप में आ गई. रामू सब कुछ देख रहा था. अपनी दोनों पत्नियों को इंसान से नागिन बनता देखकर रामू जिस जगह छुपा था. वही जोर से सीखा और डर के कारण बेहोश हो गया. रामू के चिल्लाने से दोनों नागिन पूरी तरह से घबरा गयी. और वापस इंसान वेश में आ गई. 


रामु को होश में लेन के लिए वे उसके मुंह पर पानी छिड़कने लगी. होस में आने पर रामू ने अपनी पत्नियों से कहा - कि वे उसे उनकी असलियत बताएं। रामु की पत्निया बोली - रामू यह सच है कि हम दोनों ही इच्छाधारी नागिन है. किंतु हम तुमसे विवाह करने के बाद अब तुम्हारी पत्नियों बन चुकी हैं. हमसे तुम्हें कभी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। ना ही कभी किसी को पता चलेगा कि हम नागिन हैं. हम तुम से प्रेम करते हैं. और तुम्हारे साथ जीना चाहते हैं. लेकिन हम तुम्हें किसी बात का दबाव नहीं देंगे। अब यह तुम्हारे ऊपर है कि तुम हमें अपने साथ रखना चाहते हो या अपने से दूर भेजना चाहते हो. 


पत्नियों की बात सुनने के बाद रामू को पूरा विश्वास हो गया. कि उसकी पत्नियां कभी उसको नुकसान नहीं पहुंचा सकती हैं. और उनकी इच्छाधारी नागिन होने के बाद भी उसको उनसे किसी प्रकार का भय नहीं है. तो वह अपनी पतियों के साथ आराम से रहने लगा. जब कालू को पता चला कि नगीनो की सच्चाई जाने के बाद भी रामू को कोई परेशानी नहीं है. बल्कि वे और भी खुशी के साथ अपनी पत्नियों के साथ रहता है. तो उसने यह बात पूरे गांव में फैला दी. और गांव वाले रामू की पत्नियों को मारने के लिए योजना बनाने लगे. 


एक दिन उन्होंने रामू की झोपड़ी के चारों तरफ आग लगा दी. रामू गहरी नींद में सो रहा था. पर गांव वालों ने यह भी नहीं सोचा कि झोपड़ी में आग लगाने से रामू भी अपनी पत्नियों के साथ मर जाएगा। लेकिन रामू की दोनों पत्नियों को तुरंत यह पता चल गया कि गांव वालों ने उन्हें और उनके पति को मारने के लिए झोपड़ी में आग लगा दी है. इसलिए तुरंत खुद को बाज के रूप में बदल लिया। और दोनों ने ही वहां से भागकर खुद को बचाने के बदले रामू का हाथ पकड़ा और उड़ते हुए झोपड़ी से बाहर आ गई. गांव वाले यह देखकर पूरी तरह से डर गए. और वहां से भाग गए. लेकिन रामू अपनी पत्नियों को धन्यवाद देने लगा.


इस दिन के बाद से सारे गांव में लोग रामू से डरने लगे और रामू खुशी का जीवन व्यतीत करने लगा.



आपने अभी Princess ki kahani हिंदी मै पढ़ी हमें बातये की अपने क्या सीखा इस कहानी से 

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