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पारी की जादुई कहानी Jadui Pari Ki Kahani

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 एक गांव में धनी राम नाम का सेठ रहता था. वह बहुत ही धनवान व्यक्ति था. उसकी दो-दो पत्नियां थी. पहली पत्नी का नाम था रमा और दूसरी पत्नी का नाम था मीना. छोटी पत्नी मीना दिखने में बहुत ही खूबसूरत थी. उसके काले घने बाल थे. उसकी सुंदर नीली आंखें थे. पर बड़ी पत्नी रमा ज्यादा आकर्षक नहीं थी.

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 इसलिए सेट मीना को ज्यादा प्रेम करता था. रामा दिल की साफ और शालीन औरत थी. घर के सारे काम करती थी. लेकिन मिना पूरे दिन भर शीशे के आगे बैठी रहती और सजती ही रहती थी।


एक दिन धनीराम ने अपनी छोटी पत्नी मीना को आवाज देते हुए कहा- मीना ओह मिना जरा यह आना. परन्तु मिना अपने बाल सवाल रही थी. तो उसने सेठ की आवाज सुनकर भी जवाब नहीं दिया। जब मीना नहीं गई तो रामा सेठ के पास गई तो सेठ ने उसे देखते ही कहा - 


मैंने मीना को बुलाया है तुम क्यों आई हो यहां। मिना अपने बाल सवाल रही थी तो मैं आ गयी. कोई काम है तो बताओ। तभी मीना भी वहां आ गई और आते ही रमा पर चिल्लाने लगी. मुझे आने में देर हो गई तुमने तो मेरी शिकायत करना ही शुरू कर दिया। रमा बोली - नहीं नहीं मैं तुम्हारी शिकायत नहीं कर रही थी. हां हां मुझे पता है. उन दोनों में झगड़ा बढ़ता देख धनीराम ने रमा से कहा अरे रमा तुम रहने दो. क्या छोटी-छोटी बात पर झगड़ा शुरु कर देती हो. जाओ मेरे लिए गिलास पानी लेकर आओ.


App Pad Rhe Hai jadui pari ki kahani  जब रमा पानी लेने के लिए गई तो धनीराम ने मीना से कहा- सुनो मैं व्यापार के लिए दूसरे शहर जा रहा हूं एक महीने बाद लौटूंगा। पर तुम यह बात रमा को मत बताना क्योंकि मैं चलते समय उसका मनहूस चेहरा भी नहीं देखना चाहता हूं. 


हां ठीक है. पर आप मेने लिए नयी साड़ी और गहने लेकर आना. रमा ने दोनों की बातें सुन ली थी. और सेठ की ऐसी बातें सुनकर उसे बहुत बुरा लगा. पर फिर भी उसने भगवान से कहा - हे भगवान मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मेरे पति की रक्षा करना। सेट के जाने के बाद रमा के प्रति मीना का व्यवहार और ज्यादा बिगड़ गया था और हर छोटी छोटी बात पर वे रमा पर चिल्लाने लगती।


एक बार दोनों में कहासुनी हो गई तो मीना ने रामा से कहा तुम कुरूप हो तुम्हें कोई प्यार नहीं करता। तुम किसी भी काम के लायक नहीं हो. मीना की ऐसी बातें सुनकर रमा बहुत ज्यादा दुखी हो गई. और घर छोड़ कर जंगल में चली गई. जंगल में जाने पर उसने एक पेड़ देखा। जिसके नीचे कचरा पड़ा था. तो रामा ने कहा - इस पेड़ के नीचे कितनी गंदगी है मैं यहां सफाई कर देती हूं


. और जैसे ही सफाई की तो वह पेड़ बोलने लगा-  तुम एक नेक दिन इंसान हो तुम्हारे सरे दुख साफ़ हो जाएंगे। रमा ने इस पेड़ को शुक्रिया कहा. और आगे चली गई. आगे चलने पर उसने एक केले का पेड़ देखा जो खेलों के भार की वजह से एक तरफ झुक गया था. यह पेड़ तो जुक गया है 


 इसे सहारे की जरूरत है. उसके बाद रमा ने झुके पेड़ को सहारा दिया। तो वह पेड़ भी बोलने लगा. जैसे तुमने मुझे भार की वजह से गिरने से बचाया है वैसे ही तुम भी हमेशा दुखो के भार से बची रहोगी। उसने केले के पेड़ को भी शुक्रिया कहां। और आगे चलने पर उसे एक पेड़ देखा जो लगभग सूख चुका था.


रमा ने कहा - इस पेड़ को तो पानी की जरूरत है नहीं तो यह सूख कर मर जाएगा। और रमा पास के तालाब से पानी लाकर उस पेड़ को डालती रही. तो सूखा पेड़ अचानक से हरा भरा हो जाता है. और बोलने लगता है. जिस प्रकार तुमने मुझे वापस खूबसूरत बनाया है. वैसे ही तुम हमेशा खूबसूरत रहो. जाओ पास के तालाब में डुबकी लगाकर आओ. रमा पेड़ के कहने पर तालाब में डुबकी लगाई। 


देखते ही देखते किसी परी के समान खूबसूरत हो गई. और उसका चेहरा भी चमकने लगा. रमा बोली अरे वाह मैं तो बिल्कुल ही बदल गई. और फिर जल्दी से वह वापस अपने घर गई. तो मीना उसे देखकर बिल्कुल चौकी गई. तुम तो बिल्कुल ही बदल गई हो. आखिर तुम इतनी खूबसूरत कैसे हो गई. तो रमा ने उसे सारा वाकया सुनाया तो मीणा ने कहा-  मैं भी वहां जाऊंगी और तुमसे भी ज्यादा खूबसूरत जादुई चेहरा लेकर आऊंगी।


उसके बाद मीना रमा के बताए रास्ते पर जाती है. तो उसे भी वहीं पेड़ दिखते हैं. पर उनकी तरफ ध्यान नहीं देती। तो एक पेड़ ने खुद मिना से कहा - मेरे आस पास बहुत कचड़ा पड़ा है तुम थोड़ा साफ कर दो. पर मीना ने कहा - मैं यहां कोई सफाई करने नहीं आई हु. तुम बस मुझे उस तालाब का पता बता दो जो जादुई चेहरा देता है. और इस तरह मीना सभी पेड़ों को उनके काम के लिए मना कर दी गई. और तालाब का पता पूछती गई. और फिर अंत में तालाब तक पहुंच जाती है. तो वह झट से उसमे डुबकी लगाती है.


 तो खूबसूरत होने के बजाय कुरूप हो जाती है. यह देख मीना चिल्लाने लगी. तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया। तो पेड़ो ने जवाब दिया। यह तालाब वैसा ही चेहरा देता है जैसा तुम्हारा मन है. तुम एक बुरे और घमंडी मंन की इंसान हो. तुमने हमेशा अपने रूप पर घमंड किया है. और रमा के साथ बुरा बर्ताव किया है. इसलिए तुम्हें यह मिला क्योंकि तुम इसी की हकदार हो.


इनके बाद मीना अपने किए पर बहुत दुखी हुई. परंतु रामा सेठ के पास रहती और मीना अपने किए पर रोती रहती।देखा किसी के साथ बुरा व्यवहार करने का फल कितना बुरा होता है. अगर मिना भी बुरा बर्ताव नहीं करती तो  उसे भी खूबसूरत वाला जादुई चेहरा मिलता और खुशी से रहती।


हेलो दोस्तों आज मैं जो आपको कहानी सुनाने जा रहा हु यह Rani Pari Ki Kahani है. आइए दोस्तों देखते हैं Rani Pari Ki Kahani।सीतापुर में बड़े से समंदर किनारे एक जंगल था. वहां सब नाग और नागिन रहते थे. उसी जंगल में सलोनी नाम की नागिन रहती थी. जो बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और दिल की बहुत अच्छी थी. नागिन सलोनी की सिर्फ दो सहेलियां थी. नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका। 


ये दोनों सलोनी को बिल्कुल पसंद नहीं करते। उससे बहुत ही ज्यादा ईशा करते थे. दोनों नागिन सलोनी के सामने अच्छे रहते। लेकिन पीट पीछे बहुत ही ज्यादा बुराई करते थे. यह बात नागिन सलोनी को पता थी. लेकिन फिर भी वह अपनी सहेलियों से कुछ नहीं कहती थी. मेरी कोई ऐसी सहेली हो जो मुझसे सच्ची दोस्ती करें। और मुझ पर भरोसा करें। एक दिन समंदर में बहुत बड़ा तूफान आया.


अगले दिन सुबह नागिन सलोनी और उसकी सहेलियां तीनों मिलकर समंदर के पास गई. और देखा कि एक जलपरी समंदर से बाहर आकर बेहोश पड़ी हुई है. यह तो एक जलपरी है शायद कल रात के तूफान में समंदर से बाहर आ गई है. चलो इसकी मदद करें।


नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका बोली - हमें तो बहुत काम है. हम जा रहे हैं. तुम ही इसकी मदद कर दो. अपनी सहेलियों की यह बात सुनकर नागिन सलोनी बहुत उदास हो जाती है. और खुद ही अपने नागिन रूप में आकर जलपरी की मदद करती है. अपने हाथों से जलपरी को उठाकर समंदर में डालती है. जैसे ही नागिन सलोनी ने जलपरी को समंदर में डाला वह ठीक हो गई.


 और ठीक होकर ऊपर आई. नागिन सलोनी का जलपरी ने धन्यवाद किया। दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त बन गए. नागिन सलोनी हर रोज जलपरी से मिलने के लिए समंदर के पास आती. दोनों जलपरी और नागिन सलोनी मिलकर खूब सारी बातें करते। देखते ही देखते दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए.


App Pad Rhe Hai - Rani Pari ki kahani  एक दिन नागिन सलोनी और जलपरी बैठकर बातें कर रहे थे. नागिन सलोनी बोली - मुझे एक बार समंदर की गहराई में जाकर देखना है. वहा कैसे रहते हैं. जलपरी बोली - हां मुझे भी पृथ्वी पर घूमना बहुत पसंद है. नागिन सलोनी ने अपनी शक्तियों से जलपरी को पूरा इंसानों जैसा बना दिया। सारे जंगल की सैर करवाई और अपने दोस्तों से भी नागिन सलोनी ने जलपरी को मिलवाया।


यह देखकर नागिन सलोनी के दोस्त उससे और भी ज्यादा बुराई करने लगे. नागिन सलोनी को समंदर की गहराइयों में ले गई. सारे समंदर की सैर करवाई। और अपनी मां से भी मिलवाया। समंदर की सैर करके नागिन सलोनी बहुत ही ज्यादा खुश हो गई. समंदर तो बहुत ही ज्यादा खूबसूरत है. नागिन सलोनी और जलपरी की बढ़ती हुई दोस्ती को देखकर नागिन रूद्राली और ऋषिका बहुत ही ज्यादा इरसा करने लगे.


नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका बोली - दोनों की दोस्ती तो बहुत गहरी होती जा रही है. अरे हां कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा। अगले दिन जलपरी समंदर किनारे नागिन सलोनी का इंतजार कर रही थी. तभी वहां नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका पहुंच गए. जलपरी ने कहा -  तुम्हारे साथ नागिन सलोनी क्यों नहीं आई? कहां है वह?


नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका बोली - तुम्हें पता है नागिन सलूनी तुम्हें बिल्कुल पसंद नहीं करती। वो तुम्हारे पीट पीछे तुम्हारी बहुत बुराइयां करती है. कल तो उसने कहा था कि वह आज के बाद तुम्हारे पास कभी नहीं आएगी। जलपरी बोली - नहीं-नहीं सलोनी तो मेरी बहुत अच्छी दोस्त है. वह मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं कहेगी। वह तो मुझे बहुत पसंद करती है.


नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका बोली - ऐसा नहीं कह सकती का क्या मतलब। हम तुमसे झूठ बोल रहे हैं. देख लेना आज के बाद वह यहां कभी नहीं आएगी। जलपरी बोली - मुझे नागिन सलोनी पर बहुत विश्वास है. मैं यहां से जा रही हूं.


नागिन रूद्राली और नागिन ऋषिका दोनों नागिन सलोनी के पास गई. और कहा सलोनी तुम्हें पता है?  हम अभी अभी जलपरी से मिलकर आ रहे हैं. वह तो तुम्हारे बारे में बहुत बुरा भला कह रही थी. और हम से कह रही थी कि वह तुम्हें बिल्कुल पसंद नहीं करती। हां वह तो कह रही थी कि वह तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखना चाहती। तुम उसके पास मत जाना।


नागिन सलोनी बोली - तुम दोनों मेरी दोस्त हो और जलपरी भी मेरी बहुत अच्छी दोस्त है. मैं तुम्हें भी जानती हूं. और जलपरी को भी बहुत अच्छे से जानती हूं. वह मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं कहेगी। मुझे उस पर पूरा विश्वास है. और रही बात शक्ल ना देख़ने कि वह मेरी दोस्त है. अगर वह मेरे से नाराज है. तो मैं उसे मना लूंगी। तुम दोनों चिंता मत करना।


नागिन सलोनी जाने लगी तुम कहां जा रही हो देख लेना वह नहीं आएगी कहा ना तुम दोनों चिंता मत करो. नागिन सलोनी समंदर के किनारे जाकर इधर-उधर जलपरी को ढूंढने लगी. तभी जलपरी समंदर के ऊपर आई. दोनों एक दूसरे को देख कर बहुत ही ज्यादा खुश हो गए. एक-दूसरे का हाथ पकड़ा और कहा-  मैं जानती थी. तुम मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं कहोगी। मुझे तुम पर पूरा विश्वास था. इसीलिए मैं ऊपर आई तुम्हें देखने के लिए. मुझे भी तुम पर पूरा विश्वास था. इसलिए मैं तुम्हारा इंतजार कर रही थी.


वह दोनों तो बहुत बुरी है मैं उनको नहीं छोडूंगी। सबक सिखाना पड़ेगा। वह दोनों तो अभी नादान है. आगे चलकर कुछ समझ जाएंगे सच्ची दोस्ती क्या होती है. दोनों नागिन रूद्राली और ऋषिका नागिन सलोनी और जलपरी की बातें सुन रही थी. नागिन सलोनी की अच्छाई को देखकर दोनों बहुत ही ज्यादा शर्मिंदा हो गई. दोनों ने नागिन सलोनी और जलपरी से माफी मांगी। जलपरी और नागिन सलोनी ने दोनों दोस्तों को माफ कर दिया। फिर सब दोस्त मिलकर राजी खुशी रहने लगे.


तो आपने देखा दोस्तों नागिन और जलपरी की दोस्ती। अगर दोस्ती में विश्वास हो तो उसे कोई नहीं तोड़ सकता। अगर आपको  यह कहानी अच्छी लगी हो तो जरूर शेयर करें.

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