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सांप की कहानी पंचतंत्र sanp ki kahani panchtantra

 एक समय की बात है,एक पेड़ पर बिल मे एक सांप  रहता था । वो मेढक  पतकों और पक्षीयो को खाता था। वो दिन मे आराम करता, और रात मे शिकार करता था । कुछ दिन बाद वो सांप बडा हो गया । 


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और वो उस बिल मे ना घुस पाया ,तो उसने सोचा की वो अब अपना ठिकाना बदलदेगा ।वह सांप अपने नये घर की तलास करते हुए, जंगल की ओर गया, वह एक बरगद के पेड़ पर एक बड़ा सा बिल देखा।


  उस पेड़ के नीचे चीटीयो  की पहाड़ी थी ,सांप पेड़ के पास आया और बोला, अब से इस जगह पर मै रहूँगा, तुम सब इस जगह को छोड़ कर तुरंत चले जाओ ।


 उस पेड़ के पास रहने वाले सभी जानवर और पक्षी बहोत डर गए थे, पर चीटीयो पर कोई असर नहीं हुआ ,क्योंकि वो पहाड़ी उन्होंने बहोत महेनत से बनाई थी |सभी चीटीया एक जुट होकर आगे बड़ी और उस सांप को चारों तरफ से घेर लिया, 


और उसे काटने लगे ,सांप को बहोत दर्द हुआ| और वो चिल्ला कर भागने लगा ,उसके बाद वो सांप कभी वह वापस नहीं आया| और सारे जानवर और पक्षी वहाँ पर आराम से रहने लगे।

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