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शेर और चूहा की कहानी sher aur chuha ki kahaniya

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एक हरे भरे चारागाह मैं एक शेरों का झुंड रहता था. शेरो का राजा मजे से धूप से सीख रहा था. और अपने बच्चों के साथ खेल रहा था. उसकी रानी उसके साथ बैठी हुई थी. और अपने बच्चे को राजा के साथ खेलते हुए देख खुश हो रही थी. पास में रहता था चूहों का राजा अपनी प्रजा के साथ. चूहा का राजा एक पत्थर पर बैठा हुआ था. 


और शेर की बच्चों की शरारतओं का मजा ले रहा था. एक शरारती चूहा बिल में से निकल कर बाहर आया. वह शेर के साथ खेलना चाहता था. चूहे के राजा को जब शरारती चूहे के इरादों का पता चला. तो बोला - शरारती चूहे वहां जाकर शेरों की राजा को तंग मत करो. क्यों नहीं महाराज शेरों की राजा मेरे साथ क्या करेंगे?   


वे तुम पर इतने नाराज होंगे. और तुम्हें खा जाएंगे. वह हंसने लगा. यह तो आप मुझे डराने की कोशिश कर रहे हो. वह शरारती चूहा शेरों की राजा की तरफ भागने लगा. चूहों का राजा बिल्कुल हैरान रह गया. शरारती चूहे के इस हरकत को देखकर. शरारती चूहा शेरों की राजा की दाढ़ी खींची उससे अपने लिए एक नर्म बिस्तर बनाया और इस पर लेट गया. 

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शरारती चूहे की इस हरकत को देखकर शेरों की राजा को बड़ा गुस्सा आ गया. शेरों की राजा ने अपना गुस्सा दहाड़ कर दिखाया. और अपने नाख़ून से शरारती चूहे को दूर फेंक दिया. शेरों के राजा शरारती चूहे की तरफ चल कर आए. और जोर से दहाड़े। शरारती चूहा तो डर से  थरथर कांपने रहा था. 


ये सब देखकर चूहों का राजा भागा। और आकर शेरों के राजा के सामने खड़ा होकर बोला - बचे को माफ़ कर दीजिए वो राजाओ के राजा। चूहों का राजा बोला - हे  शेरो के राजा इस छोटे से बच्चे को इसकी गलती के लिए माफ कर दो.


शेरों का राजा बोला -  इस बच्चे ने मुझे गुस्सा दिलाया है इसलिए इसे इसकी सजा मिलेगी। मैं इसे खा जाऊंगा। चूहों का राजा बोला - राजाओं के राजा इसकी जगह मैं खुद को पेश करता हूं. शेर हंसने लगा और बोला - मैं तो तुम दोनों को खा जाऊंगा। चूहों का राजा अचानक रुका और अपनी तलवार निकालकर बोला - तो मेरे पास कोई चारा नहीं है सिवाय इसके कि आप से लड़कर अपनी प्रजा की रक्षा करू. 


शेरों के राजा को बड़ी हैरानी हुई चूहों के राजा का यह जवाब सुनकर। उसने अपने पंजे चूहों के राजा की तरह बढ़ाया। चूहों का राजा डर से काँप रहा था. पर फिर भी अपनी रक्षा के लिए लड़ता रहा. शेरों की राजा ने कहा - मैं बहुत खुश हूं तुम्हारी हिम्मत को देख कर तुम्हारे इस तरह अपनी प्रजा के लिए डटे रहने से मैं खुश होकर तुम दोनों को माफ करता हूं. 


चूहों का राजा यह सुनकर बहुत खुश हुआ. और बोला - आपका बहुत-बहुत शुक्रिया महाराज आपकी जय हो मैं इस एहसान का बदला एक दिन जरूर चुकाऊंगा। कुछ दिनों बाद की बात है. शेरों का राजा अपनी रानी के साथ चारागाह में घूम रहे थे. शिकारी ने वहां जाल बिछाया हुआ था. शेरों के राजा को पकड़ने के लिए. 


अनजाने में शेरों के राजा उस पिंजरे में फंस गए. चूहों का राजा अपनी शाम की सैर के लिए जा रहा था. और उसने देखा कि राजा एक पिंजरे में कैद है. चूहों के राजा ने अपनी पूरी फौज बुलाई और राजा ने पिंजरे की तरफ इशारा करते हुए कहा.  हम सबको मिलकर शेरों के राजा को आजाद कराना है. सब लोग आ जाओ. 


सारे चूहों ने अपने दांतो से कुतरना चालू कर दिया। और जल्द ही पिंजरा टूट गया. शेरों की रानी खुशी से उछल पड़ी शेर बोला - चूहों के राजा मेरी जान बचाने के लिए आपका और आपकी और आपकी प्रजा का बहुत-बहुत शुक्रिया। चूहा के राजा बोला - हे राजाओं के राजा यह तो मेरा फर्ज था. मुझे बहुत खुशी है कि मैं आपके उस एहसान का बदला चुका सका जब आपने हमें माफ किया था. 


उस कुछ दिन के बाद से वह सबसे अच्छे दोस्त बन गए. और खुशी-खुशी रहने लगे.

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